जामुडिया में सिंहारन नदी बचाओ कमेटी ने निकाली गई पदयात्रा

आसनसोल, 17 जनवरी (हि. स.)। जामुड़िया में सिंहारन नदी की रक्षा के लिए शनिवार को सिंहारन नदी बचाओ कमेटी की तरफ से दो दिवसीय पदयात्रा निकाली गई है।

इस बारे में जानकारी देते हुए संगठन के संयोजक अजित कुमार कोड़ा ने पत्रकारों को कहा यह नदी ऐतिहासिक और प्राचीन नदी है। इस नदी के साथ इस क्षेत्र का इतिहास जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि भवानी पाठक और साधक बामा खेपा ने इस नदी के जल से सिंहारन मां काली प्रतिमा की पूजा अर्चना की थी और उन्होंने यहां पर इसी नदी के जल का उपयोग करके मां काली की आराधना की थीl अब उस नदी का अस्तिव समाप्ति के कगार पर है।

उन्होंने कहा कि खासकर जामुड़िया से लेकर बेलबाद तक नदी की हालत बहुत ज्यादा खराब है। यहां पर कारखाना मालिकों द्वारा नदी पर अतिक्रमण कर लिया गया है। जो नदी 200 फीट चौड़ी थी। वह इस क्षेत्र में सिर्फ 20 फीट की नाली बनकर रह गई है। उन्होंने कहा कि इस नदी के दुर्दशा को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री से लेकर प्रशासन के हर स्तर पर गुहार लगाई है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। आसनसोल में एक तालाब को भरा जाता है, उस पर मुख्यमंत्री बयान देती हैं लेकिन यहां एक ऐतिहासिक नदी को नष्ट किया जा रहा है। इस पर मुख्यमंत्री का कोई बयान नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि यह नदी जामुड़िया में अखलपुर से शुरू होकर दुर्गापुर के वारिया तक गई है। कारखाना मालिकों द्वारा जिस तरह से नदी को नष्ट किया जा रहा है उससे नदी के तट पर रहने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि नदी के क किनारे कई गांव बसे है। ग्रामीण पहले इस नदी के पानी का इस्तेमाल करते थे। अब हालत ऐसी हो गई है कि इस नदी के पानी के इस्तेमाल से लोगों को बीमारियां हो रही है। प्रशासन को इस तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि यह एक बहुत ऐतिहासिक नदी है और इस तरह नदी को बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता। ---------------

हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा