एसआईआर को लेकर ममता ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखी चिट्ठी
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- Jan 10, 2026
कोलकाता, 10 जनवरी (हि. स.)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर शनिवार को देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चिट्ठी लिखी है। पत्र में मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि एसआईआर के नाम पर आम लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है और इस पूरी प्रक्रिया में मानवीय संवेदनशीलता का अभाव है।
ममता बनर्जी ने लिखा कि जिस तरह से एसआईआर प्रक्रिया लागू की जा रही है, उससे आम नागरिकों में भय और मानसिक दबाव पैदा हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर से जुड़ी सुनवाई और नोटिस के कारण लोग तनाव में हैं और इससे गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि एसआईआर के डर से कई लोगों की मौत तक हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया अत्यधिक मशीन-आधारित हो गई है, जिसमें जमीनी हकीकत और मानवीय पहलुओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि आम लोग ही नहीं बल्कि देश की जानी-मानी हस्तियां भी इस प्रक्रिया में परेशान हो रही हैं। ममता ने उदाहरण देते हुए कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन, कवि जय गोस्वामी, अभिनेता दीपक अधिकारी (देव) और क्रिकेटर मोहम्मद शमी को भी एसआईआर सुनवाई के लिए नोटिस भेजे गए। पत्र में ममता बनर्जी ने एसआईआर सुनवाई में नियुक्त पर्यवेक्षकों और माइक्रो ऑब्जर्वरों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के इनकी नियुक्ति की गई है और कई पर्यवेक्षक अपनी अधिकार-सीमा से बाहर जाकर काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में आम लोगों को अपमानजनक शब्दों से भी संबोधित किया गया है। मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग के पोर्टल और तथाकथित ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ सूची को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि पश्चिम बंगाल में इस्तेमाल किया जा रहा पोर्टल अन्य राज्यों से अलग क्यों है। साथ ही उन्होंने आशंका जताई कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को सुधारना नहीं, बल्कि नाम हटाना ज्यादा प्रतीत हो रहा है। अपने पत्र में ममता बनर्जी ने प्रवासी मजदूरों की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जो लोग रोज़गार के कारण राज्य से बाहर हैं, उनके लिए पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे वे इस प्रक्रिया में शामिल हो सकें। पत्र के अंत में मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग आम जनता की परेशानियों को गंभीरता से लेगा और एसआईआर प्रक्रिया में आवश्यक सुधार करेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि शायद इस पत्र का कोई जवाब न मिले, लेकिन अपना कर्तव्य निभाते हुए उन्होंने आयोग के सामने जनता की पीड़ा रखना जरूरी समझा।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय



