हुगली, 12 जनवरी (हि. स.)। वरिष्ठ पीडीएस नेता समीर पुततुंड का रविवार देर रात निधन हो गया। उनके निधन के समय उनकी उम्र 74 वर्ष थी। बीते कुछ दिनों से वे उम्र से जुड़ी बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती थे। रात करीब 11:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके छोटे भाई संजय पुततुंड ने निधन की पुष्टि की।
1952 में जन्मे समीर पुततुंड ने राजनीति की शुरुआत सीपीएम के छात्र संगठन से की थी। वे क्रमशः दक्षिण 24 परगना जिले के सचिव समेत पार्टी की अहम जिम्मेदारियों तक पहुंचे। बाद में पार्टी की राजनीतिक लाइन को लेकर मतभेद के चलते उन्हें माकपा से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने सैफुद्दीन चौधरी के साथ मिलकर पीडीएस का गठन किया।
समीर पुततुंड की पत्नी अनुराधा पुततुंड भी माकपा की पूर्णकालिक कार्यकर्ता थीं और बाद में पीडीएस से जुड़ीं। सिंगूर-नंदीग्राम भूमि आंदोलन के दौरान समीर अनुराधा ममता बनर्जी के करीबी रहे, हालांकि बाद में उनसे राजनीतिक दूरी बन गई।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि सिंगूर-नंदीग्राम आंदोलन में उन्होंने समीर पुततुंड के साथ मिलकर काम किया था और उनका जाना व्यक्तिगत क्षति जैसा है।
समीर पुततुंड एक वैचारिक नेता के रूप में जाने जाते थे। उनकी पार्टी पीडीएस को चुनावी सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखी।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय



