शरशंका में ऐतिहासिक पौष पर्वण मेला आरंभ, आस्था-संस्कृति और सौहार्द का संगम

दांतन के शरशंका में ऐतिहासिक पौष पर्वण मेले के उद्घाटन अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु।दांतन के शरशंका में ऐतिहासिक पौष पर्वण मेले के उद्घाटन अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु।दांतन के शरशंका में ऐतिहासिक पौष पर्वण मेले के उद्घाटन अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु।

पश्चिम मेदिनीपुर, 15 जनवरी (हि. स.)। दांतन के शरशंका क्षेत्र में गुरुवार से ऐतिहासिक पौष पर्वण मेले का विधिवत शुभारंभ हो गया। इस बार परंपरा से हटकर मेला चार दिनों तक चलेगा। उद्घाटन अवसर पर विधायक परेश मुर्मू, दांतन-एक पंचायत समिति के अध्यक्ष कनक पात्र सहित जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। उद्घाटन के साथ ही शरशंका दिघी तट आस्था, संस्कृति और लोकपरंपरा के रंग में रंग उठा।

उद्घाटन समारोह में विधायक परेश मुर्मू ने कहा कि शरशंका का पौष पर्वण मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी ऐतिहासिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ आकर सौहार्द का संदेश देते हैं।

दांतन-एक पंचायत समिति के अध्यक्ष कनक पात्र ने मेले की अवधि बढ़ाए जाने को लेकर कहा कि लोगों की आस्था और बढ़ती भीड़ को देखते हुए इस वर्ष मेले को चार दिनों का किया गया है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि श्रद्धालुओं और आगंतुकों को हर सुविधा मिले।

राज्य की सबसे बड़ी दिघियों में शामिल शरशंका दिघी के तट पर यह मेला वर्षों से आयोजित होता आ रहा है। दिघी के आसपास शिव, काली, शीतला, जगन्नाथ और हनुमान मंदिरों के साथ पीर लस्कर गंज दीवान की मजार स्थित है। यही कारण है कि मेले में हिंदू-मुस्लिम सहित सभी समुदायों की समान भागीदारी देखने को मिलती है। विशेष रूप से ओडिशा से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पीर बाबा की मजार पर मत्था टेकने पहुंचते हैं।

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, “किंवदंती है कि गौड़ेश्वर शशांक ने इस विशाल दिघी का खनन कराया था, वहीं महाभारत काल के पांडवों से भी इसके इतिहास को जोड़ा जाता है।” इन लोककथाओं ने शरशंका पौष मेले को एक अलग ऐतिहासिक पहचान दी है।

मेले का आयोजन दांतन-एक पंचायत समिति और शालिकोठा पंचायत प्रशासन के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों से मेला प्रांगण गुलजार हो उठा है। लोकसंस्कृति, आस्था और परंपरा के इस संगम में शरशंका पौष पर्वण मेला एक बार फिर क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता