सागम की 14 वर्षीय शीबा अशरफ बनी कश्मीर की सबसे युवा उर्दू लेखिका

जम्मू,, 05 जनवरी (हि.स.)।

अनंतनाग के सागम की मात्र 14 वर्षीय शीबा अशरफ ने कश्मीर की साहित्यिक दुनिया में अपना एक अनमोल स्थान बना लिया है। शीबा अब तक की सबसे युवा उर्दू लेखिका के रूप में उभरकर, अपने अद्वितीय प्रतिभा और साहित्यिक कौशल का परिचय दे रही हैं।

उनकी पहली कृति “ए मुश्त-ए-ख़ाक” सिर्फ एक पुस्तक नहीं है बल्कि भावनात्मक गहराई, बौद्धिक परिपक्वता और उर्दू भाषा पर अद्भुत पकड़ का प्रतीक है। इस कृति में शामिल प्रत्येक रचना एक संवेदनशील आत्मा, विचारशील मन और काव्यात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जो पर्यवेक्षण, आत्मविश्लेषण और सांस्कृतिक जड़ों से परिपूर्ण है। उनकी लेखनी की विषयवस्तु और शैली ने पाठकों, विद्वानों और साहित्यिक जगत से सराहना प्राप्त की है।

शीबा अशरफ की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि अनंतनाग और पूरे कश्मीर घाटी के लिए गर्व का विषय है। उनकी यात्रा यह साबित करती है कि युवा प्रतिभाओं में अपार संभावनाएँ हैं और उम्र कभी भी रचनात्मकता और उत्कृष्टता की राह में बाधा नहीं बन सकती।

शीबा के शब्द और कृतियाँ एक नई पीढ़ी के लेखकों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, जो साहस और निश्चय के साथ अपने सपनों को लिख सकते हैं और साहित्यिक भविष्य को आकार दे सकते हैं। उनकी यह उपलब्धि केवल एक करियर की शुरुआत नहीं, बल्कि कश्मीर की साहित्यिक विरासत के नए युग की शुरुआत है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अश्वनी गुप्ता