सिंधी समाज ने मनाया लाल लोई त्योहार

जोधपुर, 15 जनवरी (हि.स.)। शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के उपक्रम राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद नई दिल्ली एवं सिंधी कल्चरल सोसायटी जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में लाल लोई डिण जो सिंधी कला, संस्कृति ऐं बोलीय जे वाधारे में योगदान विषय पर सेमिनार का आयोजन चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित एआर एक्सीलेंसी के सभागार में किया गया।

सिंधी कल्चरल सोसायटी जोधपुर द्वारा सेमिनार पश्चात सांस्कृतिक गतिविधि के तहत गीत, संगीत एवं नृत्य का कार्यक्रम रखा गया। कार्यक्रम की शुरुआत में लाल लोई विषय पर सेमिनार में वक्ताओं ने सिंधी भाषा को बढ़ावा देने पर अपने विचार रखे। सेमिनार पश्चात कैंप फायर के रूप में अग्नि प्रज्वलित करते हुए गीत गाए, नृत्य किया और प्रसाद आदि चढ़ाया गया। इसका आध्यात्मिक अर्थ है पुराने को त्यागना और नए को अपनाना। यह त्योहार मन की शुद्धि और नकारात्मकता को आग में जलाने का प्रतीक है।

मुख्य वक्ता वरिष्ठ लेखक एवं रंगकर्मी गोविंद करमचंदानी ने बताया कि लाल लोई सिंधी समाज का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे सर्दियों की विदाई और फसल के आगमन की खुशी में मनाया जाता है। यह उत्तर भारत के लोहड़ी त्योहार का सिंधी रूप है। वरिष्ठ रंगकर्मी हरीश देवनानी ने बताया कि लाल लोई केवल एक त्यौहार नहीं है, बल्कि यह सिंधी समुदाय के लिए अपनी जड़ों से जुड़े रहने का एक सशक्त माध्यम है।

राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद, नई दिल्ली के सदस्य अशोक मूलचंदानी ने बताया लाल लोई के पूजन के वक्त तिरमूरी पर सिंधी लोग पल्लव, गाते हुए ईश्वर से सिंधी भाषा में ही प्रार्थना की जाती है। इसमें सुख-शांति और समाज की उन्नति की कामना की जाती है, जो सिंधी संस्कारों को अगली पीढ़ी में स्थानांतरित करने का तरीका है। साथ ही उन्होंने इसे गाकर भी प्रस्तुति दी।

सचिव विजय भक्तानी ने बताया कि विभाजन के बाद, सिंधी समुदाय पूरे विश्व में फैल गया। ऐसे में लाल लोई जैसे त्यौहार बिखरे हुए समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम करते हैं। इस मौके पर गीत संगीत का कार्यक्रम भी रखा गया जिसमें जेठानंद लालवानी एवं साथियों ने त्यौहार के दौरान गाए जाने वाले पारंपरिक लोक गीतों और दुआएं आदि गीतों से धूम मचा दी।

अंत में पल्लव की प्रस्तुति से संजय भगत सतवानी, रीना कमलेश और पिंकी चंदानी ने भी भक्ति मय माहौल में अलग ही रंग जमा दिया। संचालन ललित खुशलानी ने किया, रितिका मनवानी ने इस मौके पर काव्य पाठ किया। डॉ प्रदीप गेहानी, रमेश खटवानी, राजकुमार आसुदानी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश