बंगाल एसआईआर सुनवाई में सियासी दखल पर सख्त हुआ चुनाव आयोग

कोलकाता, 04 जनवरी (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत चल रही सुनवाई प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह के राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया है कि सुनवाई सत्रों में बूथ स्तरीय एजेंटों या किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों की मौजूदगी पूरी तरह रोकी जाए।

रविवार सुबह एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में चल रहा यह सुनवाई चरण विशेष गहन पुनरीक्षण की तीन चरणों वाली प्रक्रिया का दूसरा चरण है। आयोग का यह निर्देश ऐसे समय आया है, जब हुगली और कूचबिहार जिलों में सुनवाई सत्र बाधित होने के आरोप सामने आए। आरोप है कि इन जिलों में सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस के तीन विधायकों ने, जिनमें राज्य मंत्रिमंडल का एक वरिष्ठ सदस्य भी शामिल है, सुनवाई सत्रों में दखल देकर उन्हें जबरन बंद करा दिया।

सूत्रों के मुताबिक, इन विधायकों ने सुनवाई कक्ष में अपनी पार्टी के बूथ स्तरीय एजेंटों की एंट्री और मौजूदगी की मांग की थी। इसी मांग को लेकर विवाद बढ़ा और सुनवाई प्रक्रिया बाधित हो गई।

चुनाव आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय को यह भी निर्देश दिया है कि जिलाधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए जाएं। यदि किसी भी जिले में सुनवाई सत्र को जबरन रोकने या उसमें हस्तक्षेप की कोशिश होती है, तो तत्काल जरूरी कार्रवाई की जाए।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आयोग ने अपने निर्देश में साफ कहा है कि किसी भी दल के बूथ स्तरीय एजेंट या राजनीतिक हस्तक्षेप को पूरी तरह खत्म करना जरूरी है। ऐसा करना सुनवाई प्रक्रिया में निष्पक्षता, तटस्थता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बेहद अहम है।

इससे पहले भी चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस की उस मांग को खारिज कर दिया था, जिसमें पार्टी ने मतदाता सूची के दावों और आपत्तियों से जुड़ी सुनवाई में अपने बूथ स्तरीय एजेंटों को शामिल करने की बात कही थी। आयोग ने स्पष्ट किया था कि यदि एक दल को यह अनुमति दी जाती है, तो राज्य में पंजीकृत अन्य सभी राजनीतिक दलों को भी यही अधिकार देना पड़ेगा।

आयोग के अनुसार, ऐसी स्थिति में हर एक सुनवाई टेबल पर निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, एक सूक्ष्म पर्यवेक्षक और अलग-अलग दलों के आठ बूथ स्तरीय एजेंट मौजूद होंगे। कुल मिलाकर एक ही टेबल पर लगभग 11 लोगों की मौजूदगी हो जाएगी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी में सुनवाई प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से चलाना लगभग असंभव हो जाएगा। यही वजह है कि व्यावहारिक तौर पर सुनवाई सत्रों में बूथ स्तरीय एजेंटों को अनुमति देना संभव नहीं है।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर