सिखों गुरुओं पर आतिशी की टिप्पणी को लेकर सिरसा ने आआपा नेताओं और पंजाब के मुख्यमंत्री पर बोला हमला

नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आम आदमी पार्टी (आआपा) विपक्ष की नेता आतिशी, आआपा संयोजक अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत दिवस पर दिल्ली विधानसभा में हुई घटना अपमानजनक और शर्मनाक है, आआपा और इसके नेता अब इस घटना को सत्ता का दुरुपयोग करके नकारने की कोशिश कर रहे हैं।

मंत्री सिरसा ने पूरे घटनाक्रम का सिलसिलेवार विवरण देते हुए बताया कि 6 तारीख को दिल्ली विधानसभा में संविधान के अनुच्छेद 270 के तहत गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए चर्चा हो रही थी। दोपहर 2 बजे उन्होंने प्रस्ताव रखा, जिस पर भाजपा और आआपा के विधायकों ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि एलओपी आतिशी ने गुरु तेग बहादुर जी की शहादत पर कुछ भी कहने से पहले इनकार कर दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने 3:48 बजे तक अपना वक्तव्य दिया।

“इसके तुरंत बाद 3:49 बजे नेता प्रतिपक्ष आतिशी खड़ी हुईं और “प्रदूषण पर चर्चा करो” कहते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इसी दौरान उन्होंने गुरु साहिब को लेकर ऐसे अपशब्द बोले, जिन्हें दोहराना भी पाप है।” मंत्री ने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम विधानसभा की लाइव वीडियो में साफ तौर पर रिकॉर्ड है और लाइव प्रसारण के दौरान मैंने, कपिल मिश्रा और विधायक अनिल शर्मा ने तुरंत इस पर आपत्ति दर्ज कराई।

मंत्री ने सवाल उठाया कि “जब पूरे दिन सिर्फ गुरु तेग बहादुर जी की शहादत पर चर्चा हो रही थी, तो आतिशी ने ये अपशब्द किस संदर्भ में और किसके लिए बोले?” उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष आतिशी इस सवाल का जवाब इसलिए नहीं दे पा रही हैं क्योंकि उन्होंने भारी पाप किया है और इस बात का पता उन्हें भी है।

सिरसा ने कहा कि इसके बाद आतिशी विधानसभा छोड़कर भाग गईं और पिछले कई दिनों से सार्वजनिक रूप से कहीं नजर नहीं आईं। उन्होंने कहा कि “अगर आतिशी निर्दोष हैं तो वे सामने क्यों नहीं आ रहीं? दिल्ली में शिकायत क्यों नहीं की? जब विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सत्ता पक्ष और विपक्ष- दोनों के विधायकों के अनुरोध पर स्पष्ट रूप से फॉरेंसिक जांच के लिए वीडियो भेज दिया गया था, तब आतिशी और आम आदमी पार्टी ने उस रिपोर्ट का इंतजार क्यों नहीं किया?

मंत्री ने आरोप लगाया कि जब आआपा को लगा कि फॉरेंसिक जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी, तब पुलिस का इस्तेमाल कर एफआईआर दर्ज कराई गई, जबकि न घटना पंजाब में हुई, न वीडियो पंजाब से अपलोड हुआ और न ही किसी आरोपी का पंजाब से कोई सीधा संबंध है। उन्होंने एफआईआर में लिखे गए उस कथन पर भी सवाल उठाया, जिसमें वीडियो को “डॉक्टर्ड और एडिटेड” बताया गया है। मंत्री ने कहा कि विधानसभा की पूरी कार्यवाही आज भी यूट्यूब और फेसबुक और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जस की तस मौजूद है, जिसे खुद आतिशी और आआपा के नेताओं ने सोशल मीडिया पर साझा किया है। ऐसे में छेड़छाड़ का आरोप पूरी तरह झूठा और बेबुनियाद है।

सिरसा ने कहा कि यह मामला अब सिर्फ एक राजनीतिक विवाद नहीं रहा, बल्कि यह गुरु तेग बहादुर जी के सम्मान, सिख आस्था और देश के संघीय ढांचे से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। उन्होंने कहा कि “जो पाप औरंगजेब ने सत्ता के घमंड में किया था, वही आज केजरीवाल सत्ता के घमंड में दोहरा रहे हैं।” उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से अपील करते हुए कहा कि एक सिख मुख्यमंत्री होने के नाते उनकी नैतिक जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है और उन्हें इस पाप का भागीदार नहीं बनना चाहिए।

सिरसा ने दो टूक शब्दों में कहा कि आआपा चाहे जितनी कोशिश कर ले, सच को दबाया नहीं जा सकता। सत्ता और पुलिस के सहारे इतिहास नहीं बदला जा सकता और जो लोग इस पाप में शामिल हैं, उन्हें इसका जवाब देना ही पड़ेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव