भुवनेश्वर, 21 जनवरी (हि.स.)।
महिला हीरो हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) 2025-26 का खिताब एसजी पाइपर्स के साथ जीतने वाली उदिता की सफलता ने सिर्फ उनकी टीम को ही नहीं, बल्कि उनके पति और रांची रॉयल्स के फॉरवर्ड मंदीप सिंह को भी खास तौर पर प्रेरित किया है। पुरुष हीरो एचआईएल में खेल रहे मंदीप ने कहा कि पत्नी की इस उपलब्धि ने उनके भीतर भी ट्रॉफी जीतने की भूख को और तेज कर दिया है।
मंदीप ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “मैंने फाइनल से पहले ही उससे कह दिया था कि उसकी टीम जीतेगी, लेकिन जब मैंने उसे ट्रॉफी उठाते देखा, तो वह पल बेहद खास था। मुझे उस पर बहुत गर्व महसूस हुआ। हम दोनों इस खेल के लिए जीते हैं और एक ही लीग में खेलते हैं, इसलिए उसकी जीत मेरे लिए बहुत भावुक और प्रेरणादायक रही।”
दबाव नहीं, मिली सकारात्मक प्रेरणा
उदिता की जीत को लेकर मंदीप ने साफ किया कि इससे उन पर किसी तरह का नकारात्मक दबाव नहीं है, बल्कि यह एक सकारात्मक प्रेरणा है।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “हम मजाक में कहते हैं कि उसने मुझ पर दबाव डाल दिया है, लेकिन यह अच्छा दबाव है। यह मुझे और बेहतर खेलने के लिए प्रेरित करता है। अभी मेरे पास भी मौका है और मैं उसका पूरा फायदा उठाना चाहता हूं। हमारी टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है और लगातार मैच जीत रही है।”
‘मैं भी ट्रॉफी जीतना चाहता हूं’
जब उनसे पूछा गया कि क्या पत्नी की सफलता ने उनके भीतर खिताब जीतने की भूख बढ़ा दी है, तो मंदीप ने बिना किसी झिझक के कहा, “बिल्कुल। मैं भी ट्रॉफी जीतना चाहता हूं।”
पिछले साल शादी के बंधन में बंधे इस जोड़े ने लीग शुरू होने से पहले ही तय कर लिया था कि दोनों इस सीजन में अपना सर्वश्रेष्ठ देंगे।
मंदीप ने कहा, “अगर हम दोनों ट्रॉफी जीतते हैं, तो जश्न भी खास होगा। 2026 की शुरुआत हमारे परिवार के लिए बेहद यादगार बन जाएगी।”
हर मैच में पत्नी की जीत बनी प्रेरणा
मंदीप ने स्वीकार किया कि जब भी वह मैदान पर उतरते हैं, उदिता की जीत उनके दिमाग में रहती है।
उन्होंने कहा, “हर बार जब मैं खेलने जाता हूं, तो उसकी मेडल मेरे दिमाग में होती है। यह मुझे गोल करने, मैच जिताने और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती है। मैं चाहता हूं कि उसे मुझ पर भी वही गर्व महसूस हो, जो मुझे उस पर होता है।”
हॉकी ही है जीवनशैली
सिंह परिवार की दिनचर्या भी पूरी तरह हॉकी के इर्द-गिर्द घूमती है।
मंदीप ने हंसते हुए कहा, “हम घर पर भी हॉकी से दूर नहीं रहते। सुबह साथ में जिम जाते हैं, शाम को अभ्यास करते हैं। हमारे घर के पास ही अच्छा टर्फ है, इसलिए हॉकी हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है।”
मानसिक मजबूती है उदिता की सबसे बड़ी ताकत
पुरुष लीग के नॉकआउट चरण से पहले उदिता मंदीप के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका भी निभा रही हैं।
मंदीप ने कहा, “हम रोज मैचों पर बात करते हैं। वह बताती है कि मैंने क्या अच्छा किया, कहां सुधार की जरूरत है और दबाव में शांत कैसे रहना है। उसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी मानसिक मजबूती है।”
जैसे-जैसे हीरो मेन्स एचआईएल 2025-26 अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, मंदीप सिंह का खिताब जीतने का सपना अब सिर्फ व्यक्तिगत नहीं रहा, बल्कि एक साझा लक्ष्य बन चुका है— ऐसा लक्ष्य, जो उनके घर में आधा पूरा हो चुका है और पूरा होने का इंतजार कर रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे



