गुजरात की सूरत पुलिस ने डुमस के समुद्र से पकड़ा डीजल चोरी का रैकेट

सूरत, 05 जनवरी (हि.स.)। गुजरात की सूरत पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने डुमस के समुद्री क्षेत्र में चल रहे डीज़ल चोरी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस राष्ट्रीय सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है।

डुमस के समुद्र में लंगर डाले बड़े जहाजों से मशीनों की मदद से डीज़ल चोरी की जा रही थी। गुप्त सूचना के आधार पर एसओजी ने कार्रवाई करते हुए इस संगठित नेटवर्क को बेनकाब किया। डीजल चोर जहाजों पर इलेक्ट्रिक मोटर लगाकर पाइप के जरिए डीज़ल खींचते थे। चोरी किया गया डीज़ल ड्रमों में भरकर बाजार में सस्ते दामों पर अवैध रूप से बेच दिया जाता था। पुलिस की सतर्कता से यह पूरा नेटवर्क पकड़ में आ गया।

पुलिस की छापेमारी के दौरान समुद्र किनारे के इलाके में लावारिस हालत में पड़े 75 ड्रम डीज़ल बरामद किए गए, जिनकी कीमत करीब 75 लाख रुपये आंकी गई है। सूरत स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने यह सारा माल जब्त कर लिया है और डीज़ल चोरों की गिरफ्तारी के लिए आगे की कार्रवाई तेज कर दी है।

पुलिस खुद बनी नाविक, बोट से पहुंची वारदात स्थल पर

डीज़ल चोरी के रैकेट को पकड़ने के लिए एसओजी पुलिस ने अनोखी रणनीति अपनाई। पुलिसकर्मी नाविक और समुद्री मजदूरों का वेश धारण कर खुद बोट चलाते हुए वारदात स्थल तक पहुंचे। गंजी पहनकर, कीचड़ और गंदगी की परवाह किए बिना पुलिस ने दबिश दी और रैकेट का भंडाफोड़ किया।

सूरत एसओजी के डीसीपी राजदीप सिंह नकुम ने बताया कि पुलिस की टीम आवश्यक खाने-पीने की सामग्री और पानी के साथ बोट में सवार होकर कड़िया टापू पहुंची थी। वहां करीब 17 से 18 घंटे तक कीचड़ और दलदली इलाके में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया गया। मध्य समुद्र में स्थित इस टापू से भारी-भरकम बैरल्स को तट तक लाना पुलिस के लिए शारीरिक रूप से भी बेहद कठिन कार्य रहा।

डीसीपी नकुम के अनुसार, पुलिस फिलहाल आरोपितों के मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और आर्थिक लेनदेन की गहन जांच कर रही है, ताकि इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके और पूरी श्रृंखला का खुलासा हो सके। उन्होंने आगे बताया कि इस अपराध के संबंध में पुलिस ने नई भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की है। इनमें चोरी, विश्वासघात, आपराधिक साजिश तथा ज्वलनशील पदार्थों के लापरवाह भंडारण से संबंधित धाराएं शामिल हैं।

पुलिस इस पहलू पर भी साक्ष्य जुटा रही है कि क्या इस रैकेट से राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई खतरा उत्पन्न हुआ है, क्योंकि मध्य समुद्र में जहाजों तक पहुंच बनाना एक गंभीर सुरक्षा चूक मानी जाती है। मामले में जांच तेज है और आगे और खुलासों की संभावना जताई जा रही है। इस कार्रवाई से समुद्री क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर करारा प्रहार हुआ है और डीज़ल चोरी में शामिल अन्य आरोपितों की तलाश जारी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे