बेलूड़ मठ में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती मनाई गई

कोलकाता, 12 जनवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिशन के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय बेलूड़ मठ में सोमवार को स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाई गई। हावड़ा जिला स्थित इस ऐतिहासिक मठ में दिनभर चलने वाले कार्यक्रमों में स्वामी विवेकानंद के मानव सेवा के संदेश पर विशेष रूप से चिंतन किया गया।

जयंती समारोह की शुरुआत सुबह स्वामी विवेकानंद के आध्यात्मिक गुरु श्रीरामकृष्ण परमहंस की प्रार्थना के साथ हुई। इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु स्वामी विवेकानंद, श्रीरामकृष्ण और मां शारदा के अनुयायी बेलूड़ मठ में एकत्र हुए। श्रद्धालुओं का उत्साह और समर्पण स्वामी विवेकानंद के उस ऐतिहासिक कथन को साकार करता दिखा, जिसमें उन्होंने मठ की स्थापना के बाद कहा था कि यहीं से ऐसे पवित्र विचारों की धारा प्रवाहित होगी, जो पूरे विश्व को आलोकित कर मानव जीवन की दिशा बदल देगी।

दिनभर विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। ये अनुष्ठान केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि बौद्धिक और चिंतनशील वातावरण से भी परिपूर्ण रहे। वेदपाठ, प्रवचन और आध्यात्मिक चर्चाएं कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रहीं।

चूंकि स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, इसलिए उनके विचारों से प्रेरित विभिन्न संगठनों और संस्थानों द्वारा जुलूस निकाले गए, जो अंततः बेलूड़ मठ में संपन्न हुए। कई शिक्षण संस्थानों के छात्रों ने भी सुबह के समय मठ तक प्रभात फेरी निकाली।

बेलूड़ मठ में पूरा आयोजन पूरी तरह गैर-राजनीतिक माहौल में संपन्न हुआ, जो संस्था की आध्यात्मिक परंपरा और मूल्यों के अनुरूप रहा।

इस बीच, स्वामी विवेकानंद की जयंती उत्तर कोलकाता के सिमला स्ट्रीट स्थित उनके पैतृक निवास पर भी मनाई गई। हालांकि, बेलूड़ मठ के विपरीत वहां का कार्यक्रम राजनीतिक रंग में रंगा नजर आया, जहां सत्तारूढ़ दल और विपक्षी दलों के कई नेताओं ने सोमवार सुबह से श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए उपस्थिति दर्ज कराई।----------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर