बंगाल में श्रद्धा के साथ मनाई गई स्वामी विवेकानंद की जयंती, सभी नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

कोलकाता, 12 जनवरी (हि.स.)। स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती सोमवार को पूरे पश्चिम बंगाल में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, हालांकि उत्तर कोलकाता में स्वामी विवेकानंद के पैतृक आवास के पास तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी के पोस्टरों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

रामकृष्ण मठ और मिशन के मुख्यालय बेलूर मठ में तड़के ‘मंगल आरती’ और विशेष प्रार्थनाओं के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। राज्य के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही बेलूर मठ पहुंचे और स्वामीजी को श्रद्धांजलि अर्पित की। दिन भर विभिन्न आयोजन प्रस्तावित रहे। स्वामी विवेकानंद की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में भी मनाई जाती है।

स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित रामकृष्ण मठ और मिशन की विभिन्न शाखाओं ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में शोभायात्राएं निकालीं, जिनमें बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

उत्तर कोलकाता के सिमला स्ट्रीट स्थित स्वामी विवेकानंद के पैतृक आवास पर केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार, तृणमूल नेता व राज्य मंत्री शशि पांजा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने पुष्पांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के देशभक्ति, सामाजिक सेवा और सांप्रदायिक सौहार्द के आदर्श आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं और मार्गदर्शक बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि देशप्रेम, गरीबों और पीड़ितों की सेवा तथा एकता, शांति और सद्भाव का संदेश उन्हें सदैव प्रेरित करता रहा है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत की स्वदेशी आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक स्वामी विवेकानंद की जयंती पर उन्हें सादर प्रणाम।”

उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के बीच सौहार्द का मार्ग, जो स्वामी विवेकानंद ने दिखाया, बंगाल की सामाजिक परंपरा की आधारशिला है। मुख्यमंत्री ने आशा जताई कि स्वामीजी के आदर्शों से प्रेरित होकर बंगाल के लोग, धर्म और जाति से परे, एक-दूसरे का सम्मान और प्रेम करते रहेंगे। उन्होंने स्वामी विवेकानंद की विरासत को सम्मान देने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कई कदमों का भी उल्लेख किया।

इस बीच सिमला स्ट्रीट पर तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के स्वागत में लगाए गए पोस्टरों को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। पोस्टरों में उन्हें ‘युवराज’ कहकर संबोधित किया गया था। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ही एकमात्र “युवराज” हैं और आने वाले दिनों में बंगाल की जनता इस “अहंकार” का जवाब देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के नेता कथित कोयला और मवेशी तस्करी में शामिल रहे हैं और उन्हें स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि देने का नैतिक अधिकार नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ऐसे पवित्र स्थल पर तृणमूल कांग्रेस और उसके नेताओं पर चर्चा करना भी उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी बंगाल पर “अरबी संस्कृति” थोपने की कोशिश कर रही है।

वहीं महिला एवं बाल विकास मंत्री शशि पांजा ने भाजपा की आलोचनाओं को महत्वहीन बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अभिषेक बनर्जी के समर्थक उन्हें ‘युवराज’ मानते हैं, तो इससे भाजपा को आपत्ति क्यों हो रही है।

राज्य भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य भी स्वामी विवेकानंद के पैतृक आवास पहुंचे और उन्होंने शशि पांजा से सामान्य बातचीत की। भट्टाचार्य ने कहा कि इसमें राजनीति देखने की जरूरत नहीं है और यह केवल शिष्टाचारवश हुआ संवाद था।------------------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर