हिसार में जाति अनुसार श्मशान बनाने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट
- Admin Admin
- Jan 15, 2026
खासा महाजन गांव में अलग-अलग श्मशान घाट बनाकर
बोर्ड लगाने का मामला
हिसार, 15 जनवरी (हि.स.)। जिले के अग्रोहा खंड
के गांव खासा महाजन में स्वर्ण व अनुसूचित जाति समुदाय के अलग-अलग श्मशान घाट बनाकर
उनके बोर्ड लगाने का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने इस
मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
इस संबंध में बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व
सदस्य सुशील वर्मा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायत भेजी थी। शिकायत में आरोप
लगाया गया था कि गांव के श्मशान घाट में सामान्य वर्ग एवं अनुसूचित जाति समुदाय के
लिए अलग-अलग अंतिम संस्कार स्थल अवैध रूप से चिह्नित किए गए हैं और इस भेदभाव को लागू
करने के लिए बोर्ड भी लगाए गए हैं। यह कृत्य न केवल असंवैधानिक है, बल्कि मानव गरिमा,
समानता और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के भी विरुद्ध है।
शिकायत के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य
प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे मानवाधिकारों का प्रथम दृष्टया उल्लंघन
मानते हुए मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के अंतर्गत संज्ञान लिया है।
आयोग ने हिसार के जिला उपायुक्त को निर्देश दिए हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दो
सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत की जाए।
आयोग ने यह भी माना है कि इस प्रकार की प्रथाएं
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 17 का उल्लंघन हैं तथा अस्पृश्यता और सामाजिक
बहिष्कार को बढ़ावा देती हैं, जो कि लोकतांत्रिक समाज में अस्वीकार्य है। शिकायतकर्ता
सुशील वर्मा ने आयोग से मांग की है कि दोषी व्यक्तियों एवं अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी
कार्रवाई की जाए और देशभर में इस प्रकार की अमानवीय और असंवैधानिक प्रथाओं पर रोक लगाने
के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए जाए।
सरपंच ने कही बोर्ड हटाने की बात
इस संबंध में सरपंच मंजू बाला फगेड़िया का कहना
है कि गांव में कई वर्षों से ही यह श्मशान घाट अलग-अलग बने हुए हैं। जनरल का श्मशान
घाट गांव के नजदीक है और एससी का गांव से थोड़ी दूरी पर है। जरनल श्मशान घाट में एससी
को छोड़कर सभी को अंतिम संस्कार की इजाजत है, यह पुरानी परंपरा चली आ रही है। हां बोर्ड
को लेकर विवाद उठा था, इसके बाद इसे हटा दिया गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर



