गुजरात के गिर इलाके में शेरनी को बेहोश करने का इंजेक्शन वनकर्मी को लगा, मौत
- Admin Admin
- Jan 05, 2026
जूनागढ़, 05 जनवरी (हि.स.)। गुजरात के गिर क्षेत्र में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। शेरनी को बेहोश करने के लिए वन कर्मियों की ट्रेंकुलाइजर गन से चलाया गया इंजेक्शन साथी वन कर्मी को लग गया, जिससे सोमवार को उसकी मौत हो गयी। इससे वन कर्मियों में व्याप्त शोक हो गया।
यह हादसा विसावदर के नानी मोणपरी गांव में रविवार को मासूम बच्चे को मारने वाली मानवभक्षी शेरनी को पिंजरे में कैद करने गई वन विभाग की टीम के साथ हुआ। गिर के इतिहास में इस तरह की यह पहली घटना बतायी जा रही है। जूनागढ़ के मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) रतन नाला ने घटना की पुष्टि की है।
विसावदर के नानी मोणपरी गांव में रविवार को 4 वर्षीय शिवम नामक बच्चे को शेरनी के मार डालने की घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई थी। इसके बाद मानवभक्षी शेरनी को पकड़ने के लिए वन विभाग ने युद्धस्तर पर अभियान शुरू किया था। शेरनी की लोकेशन मिलते ही उसे बेहोश (ट्रेंकुलाइज) करने के लिए वनकर्मियों ने ट्रेंकुलाइज़र गन का इस्तेमाल किया। इसी दौरान दुर्भाग्यवश गन से छोड़ा गया इंजेक्शन शेरनी को लगने के बजाय मौके पर मौजूद वन विभाग के ट्रैकर अशरफभाई चौहान को जा लगा।
इससे अशरफभाई की तबीयत बिगड़ गई। वन ट्रैकर अशरफभाई को तत्काल उपचार के लिए जूनागढ़ के अस्पताल में भर्ती कराया गया। रविवार रात से ही उनकी हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई थी और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद अशरफभाई को नहीं बचाया जा सका। आज तड़के उन्होंने दम तोड़ दिया। ड्यूटी के दौरान एक वनकर्मी की इस तरह से मौत से वन विभाग के उच्च अधिकारियों समेत पूरे स्टाफ में शोक की लहर है।
जूनागढ़ के मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) रतन नाला ने बताया कि बीते दिन गिर पश्चिम वन विभाग के विसावदर रेंज अंतर्गत नानी मोणपरी गांव के पास एक 4 वर्षीय मासूम बच्चे को शेरनी ने अपना शिकार बना लिया था, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना के बादमानवभक्षी शेरनी को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया था। रेस्क्यू के दौरान शेरनी को बेहोश (ट्रेंकुलाइज) करने के लिए ट्रेंकुलाइज़र गन से डार्ट फायर किया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश यह डार्ट शेरनी को लगने के बजाय वहां मौजूद वन विभाग के ट्रैकर स्टाफ में शामिल अशरफभाई को लग गया।
घटना के तुरंत बाद घायल ट्रैकर को प्राथमिक उपचार के लिए विसावदर ले जाया गया, जहां से उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे आगे इलाज के लिए जूनागढ़ सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान आज सुबह करीब 7:00 बजे ट्रैकर अशरफ ने दम तोड़ दिया।
सीसीएफ ने बताया कि शेरनी का वजन आमतौर पर मनुष्य के वजन से लगभग तीन गुना अधिक होता है। जहां एक सामान्य मनुष्य का वजन करीब 70 किलोग्राम माना जाता है, वहीं शेरनी का वजन 200 किलोग्राम से भी अधिक होता है। इसी आधार पर हिंसक वन्य प्राणियों को बेहोश करने के लिए ट्रेंकुलाइज़र की डोज तय की जाती है। मनुष्य का वजन अपेक्षाकृत कम होने के कारण, शेरनी के लिए तय की गई भारी मात्रा की दवा का डार्ट ट्रैकर के शरीर में प्रवेश कर गया, जो उसके लिए बेहद घातक साबित हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे



