हीरानगर में 1953 के आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई

Tributes paid to martyrs of the 1953 movement


कठुआ, 11 जनवरी । कठुआ जिला की तहसील हीरानगर के समाधि स्थल पर 1953 के आंदोलन में शहीद हुए भीख्म सिंह और बिहारी लाल जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। राज्यसभा सांसद और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और शहीदों को नमन किया। इस अवसर पर हीरानगर के विधायक विजय शर्मा उपस्थित थे।

स्वर्गीय श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आंदोलन को जारी रखते हुए 1953 में जम्मू कश्मीर में प्रजा परिषद का गठन हुआ, जिसमें जम्मू और कश्मीर के कई वीरों ने इस आंदोलन में अपनी जान की कुर्बानी दी थी। इन शहीदों में भीखम सिंह और बिहारी लाल जी भी शामिल थे, जिन्होंने 1953 में शेख अब्दुल्ला सरकार के खिलाफ आंदोलन में भाग लेते हुए अपनी शहादत दी थी। 1953 में जम्मू-कश्मीर में एक महत्वपूर्ण आंदोलन चला था। उनका मुख्य उद्देश्य जम्मू और कश्मीर को भारत के अन्य राज्यों की तरह समान दर्जा दिलाना था। इस शहीदों ने एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान की व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई थी। और अपने प्राणों की आहुति दी थी।

श्रद्धांजलि सभा में सत शर्मा ने कहा कि शहीदों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। इन शहीदों का इतिहास बहुत ही प्रेरणादायक है, जिन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। हीरानगर के विधायक विजय शर्मा ने बताया कि 1953 में प्रजा परिषद के नेतृत्व में शुरू हुए आंदोलन में भीखम सिंह और बिहारी लाल जी शहीद हुए थे। इस आंदोलन में कई वीर शहीद हुए थे, जिन्हें हर वर्ष याद किया जाता है। शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में भाजपा नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल थे। सभी ने शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि दी और उनके बलिदान को याद किया।

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