काठमांडू, 02 जनवरी (हि.स.)। जेन-जी आंदोलन की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा और पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचंड’ से जवाब तलब किया है। आठ सितंबर को हुए जेन जी प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग से लेकर नौ सितंबर को हुई आगजनी की घटना तक को लेकर दोनों पूर्व प्रधानमंत्री को लिखित प्रश्न भेजे गए हैं।
आयोग के सदस्य विज्ञान राज शर्मा ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि “हमने दोनों नेताओं को लिखित प्रश्न भेज दिए हैं।” उल्लेखनीय है कि नौ सितंबर को उग्र प्रदर्शन के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा के घर पर आक्रमण कर उन्हें और उनकी पत्नी तत्कालीन विदेश मंत्री डॉ. आरजू देउवा को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था और उनके पूरे घर को आग के हवाले कर दिया था। इस दौरान देउवा दंपत्ति के घर से करोड़ों रुपये और अमेरिकी डॉलर लूटे जाने और करीब 700 करोड़ रुपये की नकदी घर में ही जलाने की घटना हुई थी।
इसी तरह पूर्व प्रधानमंत्री और माओवादी पार्टी के अध्यक्ष प्रचण्ड के घर में भी प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी थी। प्रचण्ड उस समय प्रमुख प्रतिपक्षी नेता थे। उपद्रवियों ने न सिर्फ प्रचण्ड के निजी आवास पर बल्कि उनकी दोनों बेटियों रेणु दहाल और गंगा दहाल के निजी घरों में भी आग लगा दी थी। न्यायाधीश गौरीबहादुर कार्की के नेतृत्व वाला जांच आयोग तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को भी बयान के लिए बुलाने की तैयारी कर रहा है। आयोग के एक अधिकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम तक ओली को बयान देने के लिए उपस्थित होने के लिए पत्र भेजा जाएगा।
आयोग अब तक 150 से अधिक व्यक्तियों के बयान ले चुका है। इनमें से कई से घटनास्थल के प्रत्यक्षदर्शी के रूप में लिखित विवरण भी लिया गया है। आयोग के सदस्य शर्मा ने बताया, “हमने बड़ी संख्या में लोगों के बयान लिए हैं और प्रत्यक्षदर्शियों से घटनाओं का विवरण कागजी रूप में दर्ज कराया है।” आयोग ने कुछ मृतकों के परिजनों से भी घटना विवरण लिया है। जांच आयोग ने प्रधान सेनापति अशोकराज सिग्देल, सशस्त्र पुलिस बल के महानिरीक्षक राजु अर्याल तथा नेपाल पुलिस के आईजीपी दानबहादुर कार्की के भी बयान लिए हैं।
इसके अलावा, जेन-जी आंदोलन के दौरान सशस्त्र बल के कार्य विभाग का नेतृत्व करने वाले एआईजी नारायणदत्त पौडेल, सशस्त्र के डीआईजी सुरेश श्रेष्ठ, नेपाल पुलिस के डीआईजी ओम राणा और एआईजी सिद्धिविक्रम शाह सहित अन्य अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। आयोग ने राष्ट्रीय अनुसंधान विभाग के पूर्व प्रमुख (मुख्य अनुसंधान निदेशक) हुतराज थापा, पूर्व मुख्य सचिव एकनारायण अर्याल, उपत्यका प्रभारी डीआईजी कृष्ण खनाल तथा नेपाल पुलिस के एसपी अपिल बोहरा और कुलदीप चन्द के भी बयान लिए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास



