ई-कॉमर्स के नाम पर साइबर ठगी करने वाले दो शातिर ठग गिरफ्तार

जयपुर, 1 जनवरी (हि.स.)। साइबर पुलिस थाना जयपुर ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए की जा रही संगठित साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का खुलासा करते हुए शातिर साइबर ठग गिरोह के दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अमोल चोपड़ा निवासी छत्तीसगढ़ और सक्षम खंडेलवाल निवासी प्रताप नगर जयपुर को गिरफ्तार किया है। जबकि गिरोह से जुड़े अन्य आरोपितों की तलाश जारी है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपित आम लोगों को फर्जी और मैलिशियस लिंक भेजकर उनके मोबाइल फोन हैक करते थे। इसके बाद पीड़ितों के क्रेडिट और डेबिट कार्ड विवरण का दुरुपयोग कर फ्लिपकार्ट, अमेजन, स्विगी, ज़ेप्टो और ब्लिंकिंग जैसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से महंगे मोबाइल फोन और अन्य कीमती सामान ऑर्डर करते थे। पूरे मामले का खुलासा मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर हुआ। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने तकनीकी विश्लेषण और गोपनीय इनपुट के आधार पर कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपितों को दबोच लिया।

पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित पुलिस जांच से बचने और वित्तीय लेन-देन छुपाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करते थे। इसके जरिए वे साइबर ठगी से प्राप्त रकम को ट्रेस होने से बचाते थे।

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ऑनलाइन साइबर धोखाधड़ी और ई-कॉमर्स अपराधों की रोकथाम के लिए एसीपी (क्राइम) मनीष अग्रवाल के निर्देशन में विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों ने आरोपितों की पहचान कर उनके नेटवर्क को तोड़ने में सफलता हासिल की है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपित थर्ड पार्टी एप्लिकेशन, डिजिटल पहचान चोरी और फ्लिपकार्ट मिनट जैसी फास्ट डिलीवरी सेवाओं का उपयोग कर कम समय में सामान मंगाते थे। साइबर ठगी से खरीदे गए नए मोबाइल फोन को नेपाल के रास्ते दूसरे देशों में भेजा जाता था। जिसके पुख्ता साक्ष्य पुलिस को मिले हैं।

पुलिस उपायुक्त (अपराध ) अभिजित सिंह ने बताया मामले में साइबर पुलिस थाना जयपुर में विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच की जा रही है। गिरफ्तार आरोपित अमोल चोपड़ा को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है, जबकि कोर्ट ने दूसरे आरोपित सक्षम खण्डेलवाल को दो दिन की पुलिस रिमांड पर सौंपा है।

पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश के साथ-साथ डिजिटल, वित्तीय और अंतरराष्ट्रीय लिंक की गहन जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में इसे अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह माना जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश