14 जनवरी को मनाई जाएगी मकर संक्रांति : डा. जगदीश प्रसाद कोठारी
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- Jan 13, 2026
-एकादशी का उपवास न रखने वाले श्रद्धालु खिचड़ी का दान भी कर सकते हैं और सेवन भी
मुरादाबाद, 13 जनवरी (हि.स.)। अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिषाचार्य व राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित मुरादाबाद के डा. जगदीश प्रसाद कोठारी ने मंगलवार को बताया कि मकर संक्रांति का पर्व बुधवार 14 जनवरी को मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन होने के कारण एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु 14 जनवरी को खिचड़ी का दान न करें।
डा. जगदीश प्रसाद कोठारी ने कहा कि इस बार संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन होने के कारण एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु फलाहार लें और तिल, फल व वस्त्र का दान करें। इसके अलावा जो लोग एकादशी का उपवास नहीं रखते है वह खिचड़ी का दान भी कर सकते है और खिचड़ी का सेवन भी कर सकते है। क्याेंकि एक वर्ष में एकादशी की संख्या 24 या 26 हो सकती लेकिन मकर संक्रांति एक ही होगी। 14 जनवरी को एकादशी का व्रत रखने वाले द्वादशी लगने पर 15 जनवरी को खिचड़ी खाकर व्रत का पारण कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सामान्य श्रद्धालु पुण्यकाल में स्नान-दान और खिचड़ी का वितरण कर सकते हैं, लेकिन एकादशी व्रती को संयम रखना आवश्यक है।
डा. जगदीश प्रसाद कोठारी ने बताया कि मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। शास्त्रों में इस दिन किए गए स्नान, दान अत्यंत पुण्यकारी बताया गया है। दान से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली बढ़ती है। डा. जगदीश प्रसाद कोठारी ने बताया कि जहां मकर संक्रांति का पर्व अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता हैं वहीं मकर संक्रांति पर बेनी माधव (भगवान विष्णु का रूप) की पूजा का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। जब सभी ग्रहों के राजा सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह पर्व संक्रांति के रूप में मनाया जाता है।
14 व 15 जनवरी दोनों दिन मनेगा पर्व
श्री हरि ज्योतिष संस्थान के संचालक ज्योतिर्विद् पंडित सुरेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार मकर संक्रांति 14 व 15 जनवरी दोनों दिन मनाई जाएगी लेकिन 14 जनवरी को मानना ज्यादा शुभ रहेगा। शर्मा ने बताया कि सूर्यदेव 14 जनवरी को दोपहर 3:07 पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। वहीं महा पुण्य काल दोपहर 03:07 बजे से शाम 04:58 बजे तक व पुण्य काल 5:48 तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में किया गया स्नान-दान और पूजा कई गुना पुण्य फल प्रदान करती है। माना जाता है कि इस शुभ काल में दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और साधक के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल



