ग्रामीण आजीविका मिशन : कन्नौज में इत्र के कारोबार से आत्मनिर्भर बनीं महिलाएँ, मिली ग्लोबल पहचान

कन्नौज में इत्र के कारोबार से आत्मनिर्भर बनीं महिलाएँ, मिली ग्लोबल पहचान

- स्वयं सहायता समूहों को बाज़ार से जोड़ने की पहल से महिलाओं को मिले रोजगार के नए अवसर

- मलेशिया की प्रदर्शनी में भी पसंद किए गए थे कन्नौज के इत्र और गुलाब जल

कन्नौज, 07 जनवरी (हि. स.)। योगी सरकार के ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर उत्तर प्रदेश के जनपद कन्नौज के स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ आज गुलाब की खेती, इत्र और गुलाब जल बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। मिशन के तहत मिले प्रशिक्षण, सरकारी सहायता और विपणन के अवसरों से इन महिलाओं को न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँच मिली है। कन्नौज की पारंपरिक इत्र पहचान अब इन महिलाओं के जरिए नई ऊँचाइयों तक पहुँच रही है।

इत्र के कारोबार से जुड़े जनपद कन्नौज के दो स्वयं सहायता समूहाें की महिलाएं लगातार आमदनी बढ़ा रही हैं। सरस मेला और स्वयं सहायता समूहों को बाज़ार से जोड़ने की पहल से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। ये महिलाएँ थोक और पैक्ड बोतलों में इत्र और गुलाब जल बेचकर लाखों की कमाई कर रही हैं। जब मेला नहीं लगा होता तो क़रीब 70 हज़ार के आसपास की कमाई होती है। मेलों में कमाई एक लाख के ऊपर पहुँच जाती है। एक समूह में 10 महिला सदस्य हैं।

गुलाब की खेती करती हैं समूह की महिलाएं

बाबा गौरी शंकर स्वयं सहायता समूह की सदस्य तरावती बताती हैं कि योगी सरकार की योजना के तहत मिली आर्थिक मदद से समूह ने इत्र निर्माण के लिए कारखाना स्थापित किया है, जहाँ इत्र तैयार किया जाता है। कच्चे माल के लिए फूल कानपुर मंडी और हाथरस से लिए जाते हैं, वहीं समूह की महिलाएँ खुद भी गुलाब की खेती करती हैं। तरावती के अनुसार, समूह के उत्पाद पिछले साल नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो (इंडिया–रूस स्टॉल) और सरस मेले में प्रदर्शित किए गए, जहाँ अच्छी बिक्री हुई। मेलों के माध्यम से लगभग एक लाख रुपये तक की बिक्री हुई है। उनके बनाए गुलाब जल का उपयोग ब्यूटी और कॉस्मेटिक उत्पादों में भी किया जा रहा है।

विदेश में भी बनाई पहचान

गौरी शंकर स्वयं सहायता समूह की सदस्य आरती के अनुसार, समूह के इत्र और गुलाब जल के उत्पाद 2025 में मलेशिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में लगाए गए थे, जहाँ विदेशी खरीदारों ने रुचि दिखाई और ऑर्डर भी दिए। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली यह पहचान महिलाओं के लिए बड़ा अवसर साबित हुई। इसके बाद इन उत्पादों को देश के बड़े सरकारी मेलों में भी स्थान मिला। वर्ष में 3 से 4 बड़े सरकारी और राष्ट्रीय स्तर के मेले लगाए जाते हैं, जिनमें इन समूहों के स्टॉल लगाए जाते हैं। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर 10 से 12 मेलों में भी नियमित रूप से भागीदारी होती है। मेलों के साथ-साथ बाहर से भी ऑर्डर मिलते हैं। राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश तक इत्र और गुलाब जल की सप्लाई की जा रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / संजीव झा