बीएचयू में शनिवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

-ओड़िया भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक पहचान पर होगा मंथन

वाराणसी, 16 जनवरी (हि.स.)। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कला संकाय अंतर्गत कवि सम्राट उपेन्द्र भेजा ओड़िया पीठ द्वारा “ओड़िया भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक पहचान के निर्माण का पुनर्पाठ” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 17 जनवरी से किया जाएगा।

यह संगोष्ठी परिसर स्थित महामना सभागार, मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में आयोजित होगी। देशभर से आए विद्वान, लेखक और शिक्षाविद भाग लेंगे। संगोष्ठी में ओड़िया भाषा और साहित्य के ऐतिहासिक विकास, साहित्यिक परंपराओं, पांडुलिपि विरासत, मौखिक परंपराओं तथा समकालीन संदर्भों में उनकी भूमिका पर व्यापक विमर्श किया जाएगा।

उद्घाटन सत्र में बीएचयू के कुलपति प्रोफेसर अजित कुमार चतुर्वेदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। प्रोफेसर कैलाश पटनायक, पूर्व डीन, स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज, विश्व भारती, शांतिनिकेतन विशिष्ट अतिथि होंगे, जबकि सत्र की अध्यक्षता कला संकाय की अधिष्ठाता प्रोफेसर सुषमा करेंगी।

यह जानकारी बीएचयू के जनसंपर्क अधिकारी ने शुक्रवार को दी। उन्हाेंने बताया कि संगोष्ठी के अकादमिक सत्रों में ओड़िया आलोचनात्मक विमर्श पर प्रोफेसर जितेन्द्र कुमार नायक मुख्य भाषण देंगे। इसके अतिरिक्त डॉ. गौरहरि दास, प्रोफेसर विष्णु महापात्र, प्रोफेसर लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, डॉ. हृषिकेश पांडा, प्रोफेसर यशोधरा मिश्र तथा केदार मिश्र सहित अनेक विद्वान विभिन्न सत्रों में अपने शोध-पत्र प्रस्तुत करेंगे।

दूसरे दिन आमंत्रित वक्ताओं के साथ एक गोलमेज परिचर्चा आयोजित की जाएगी। इसके पश्चात समापन सत्र में डॉ. आनंद विक्रम सिंह सहित ओड़िया पीठ के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा संबोधन किया जाएगा।

संगोष्ठी के अंतर्गत एक सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन किया गया है, जिसमें शुभकांत साहू द्वारा हिंदुस्तानी बाँसुरी वादन तथा विद्यार्थियों द्वारा ओडिसी नृत्य की प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी