वाराणसी: फूलमंडी पर नगर निगम का कब्जा, अब अनुबंध के बाद होगा कारोबार

अवैध कब्जेदारों पर बड़ी कार्रवाई, अनधिकृत दुकानों को किया गया सील

वाराणसी, 14 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी नगर निगम ने अवैध कब्जेदारों के खिलाफ बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए मलदहिया (इंग्लिशिया लाइन) स्थित किसान फूल मंडी के समीप स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि को अपने कब्जे में ले लिया। यह भूमि रक्षा सम्पदा विभाग के स्वामित्व में है और नगर निगम के प्रबंधाधीन थी, जिस पर लंबे समय से अवैध कब्जा किया गया था।

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के निर्देश पर नगर निगम प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर अवैध कब्जा हटाया और परिसर में अनधिकृत रूप से बनी दुकानों को सील कर दिया। जांच में सामने आया कि फूल विक्रेताओं और दुकानदारों से विशाल दुबे द्वारा अवैध रूप से किराया वसूला जा रहा था।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, वरुणापार जोनल अधिकारी द्वारा की गई जांच के बाद 30 दिसंबर 2025 को भवन संख्या एस-21/112-के-1 के संबंध में प्रमोद कुमार के नाम जारी पीला कार्ड को निरस्त कर दिया गया था। इसके बावजूद इस भूमि पर अनधिकृत रूप से किराया वसूली जारी थी।

इस कार्रवाई के विरुद्ध विशाल दुबे ने नगर आयुक्त के समक्ष अपील दायर की थी, लेकिन कोई वैध कानूनी साक्ष्य प्रस्तुत न कर पाने के कारण उनकी अपील खारिज कर दी गई।

अब नगर निगम से करना होगा अनुबंध

सहायक नगर आयुक्त अनिल यादव ने बताया कि अब इस क्षेत्र में माला-फूल का व्यवसाय करने वाले सभी विक्रेताओं को नगर निगम के साथ औपचारिक अनुबंध करना होगा। साथ ही व्यापारियों को किराया सीधे नगर निगम को देना होगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्व में अवैध अध्यासी के नाम पर काटी जा रही सभी टैक्स रसीदों को पूरी तरह अवैध घोषित कर दिया गया है।

नगर निगम का मानना है कि इस नई व्यवस्था से जहां निगम के राजस्व में वृद्धि होगी, वहीं लगभग 500 किसानों और व्यापारियों को सुव्यवस्थित और सुरक्षित व्यापारिक स्थान उपलब्ध कराया जा सकेगा।

नगर आयुक्त की सख्त चेतावनी

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने निर्देश दिए हैं कि यदि उक्त भूमि पर भविष्य में किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा पाया गया, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने राजस्व विभाग को मंडी परिसर में नियमानुसार किराया वसूली और प्रभावी प्रबंधन व्यवस्था तत्काल लागू करने के निर्देश भी दिए हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी