मां विंध्यवासिनी के दरबार में पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने टेका माथा

विंध्यधाम में दर्शनार्थियों की भीड़।

- नववर्ष पर विंध्यधाम में आस्था का सैलाब

मीरजापुर, 01 जनवरी (हि.स.)। नए साल के पहले दिन गुरुवार को विंध्यधाम आस्था और श्रद्धा के महासागर में तब्दील हो गया। मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन के लिए देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि मुख्य सड़क से लेकर मंदिर परिसर तक लंबी कतारें लगी रहीं। अनुमान के अनुसार दिनभर में पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

भोर से ही दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात तक अनवरत चलता रहा। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। बुधवार की रात से ही होटल, धर्मशालाओं और रैन बसेरों में ठहरे श्रद्धालु मध्यरात्रि के बाद गंगा स्नान के लिए घाटों की ओर बढ़ने लगे। मंगला आरती से पूर्व स्नान कर श्रद्धालु माता की एक झलक पाने के लिए गर्भगृह की ओर जाने वाले मार्गों पर कतारबद्ध हो गए।

मंगला आरती के पश्चात मंदिर के कपाट खुलते ही “जय मां विंध्यवासिनी” के जयघोष से पूरा धाम गूंज उठा। किसी ने गर्भगृह में जाकर दर्शन किए तो किसी ने झांकी दर्शन से ही स्वयं को धन्य किया। माता के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में विराजमान अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों के दर्शन कर हवन कुंड में आहुति दी।

मां विंध्यवासिनी के दर्शन के उपरांत बड़ी संख्या में श्रद्धालु अष्टभुजा पहाड़ और काली खोह की ओर रवाना हुए। त्रिकोण मार्ग दिनभर भक्तों से गुलजार रहा। माता काली और अष्टभुजा देवी के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि और मंगलकामनाओं की प्रार्थना की।

श्री विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी एवं मंत्री भानु पाठक ने संयुक्त रूप से बताया कि वर्ष के पहले बृहस्पतिवार को पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन किए। अध्यक्ष के निर्देश पर पंडा समाज के पदाधिकारी व सदस्य पूरे दिन श्रद्धालुओं की सेवा और व्यवस्थाओं में जुटे रहे। नववर्ष के पहले दिन विंध्यधाम में उमड़ा यह जनसैलाब एक बार फिर यह संदेश दे गया कि मां विंध्यवासिनी के दरबार में आस्था कभी ठंड से नहीं जमती, बल्कि हर वर्ष नए उत्साह के साथ और प्रबल होती जाती है।

हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा