राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने सीएमओ कार्यालय के कनिष्ठ लिपिक को दिलाया इंसाफ
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- Jan 11, 2026

- निराधार भ्रष्टाचार के आरोपों से लिपिक राजीव गुप्ता बरी, आयोग ने माना अन्याय
मीरजापुर, 11 जनवरी (हि.स.)। न्याय में भले ही देर हो, लेकिन जब सत्य सामने आता है तो वह व्यवस्था की सबसे कठोर दीवारों को भी तोड़ देता है। सीएमओ कार्यालय से जुड़े कनिष्ठ लिपिक राजीव कुमार गुप्ता को लगभग चार वर्षों बाद राहत मिली है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण के राज्यमंत्री सोहन लाल श्रीमाली ने मामले की सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि राजीव गुप्ता पर लगाए गए अनधिकृत धनार्जन एवं भ्रष्टाचार के आरोप निराधार और तथ्यहीन थे।
बिना साक्ष्य किया गया था स्थानांतरण
प्रकरण के अनुसार, नगर के बथुआ स्थित टंडनपुरी कॉलोनी निवासी किरन गुप्ता ने 24 अक्टूबर 2024 को राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग उत्तर प्रदेश शासन को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि उनके पति राजीव कुमार गुप्ता को भ्रष्टाचार और अनधिकृत धनार्जन की कथित शिकायतों के आधार पर विन्ध्याचल मंडल मीरजापुर से अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया। जबकि वह लगभग 26 वर्षों से उसी मंडल में कार्यरत थे। आयोग की सुनवाई के दौरान जब संबंधित विभाग से आरोपों के समर्थन में साक्ष्य मांगे गए तो मंडलायुक्त कार्यालय सहित कोई भी विभागीय प्रतिनिधि ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका। सुनवाई में उपस्थित विभागीय प्रतिनिधि ने मौखिक रूप से यह स्वीकार किया कि राजीव गुप्ता के साथ अन्याय हुआ है।
सरकारी आदेश से हटाए गए आरोप
चिकित्सा अनुभाग-4 उत्तर प्रदेश शासन के विशेष सचिव के निर्देश पर निदेशक (प्रशासन) की ओर से जारी आदेश में पूर्व कार्यालय ज्ञाप से अनधिकृत धनार्जन एवं भ्रष्टाचार से संबंधित अंश को विलोपित कर दिया गया। इससे स्पष्ट हो गया कि राजीव पर लगाए गए आरोप निराधार, अनुचित और असत्य थे। आयोग ने इसे पिछड़ा वर्ग के कर्मचारी के उत्पीड़न की श्रेणी में माना और कहा कि झूठे आरोपों के कारण उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची और कार्यस्थल पर उन्हें अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा।
महोबा में भी झेलना पड़ा मानसिक उत्पीड़न
मामले में यह भी सामने आया कि स्थानांतरण के बाद महोबा में तैनाती के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा उनके पत्र रिसीव करने से इनकार किया गया और अपीलीय पत्रों को अग्रसारित नहीं किया गया। इससे राजीव गुप्ता को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी और उनकी कार्यालय उपस्थिति भी प्रभावित हुई।
आयोग का निर्देश
सभी तथ्यों पर विचार करते हुए आयोग ने निर्देश दिया कि राजीव गुप्ता की रोकी गई एक वेतनवृद्धि बहाल की जाए। अब तक के समस्त बकाया वेतन का भुगतान किया जाए और की गई कार्यवाही से एक माह के भीतर आयोग को अवगत कराया जाए।
हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा



