गंगोत्री हाईवे पर देवदार वृक्षों की सूचना बीआरओ को 7 दिनों देने के निर्देश
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- Jan 12, 2026
उत्तरकाशी, 12 जनवरी (हि.स.)। गंगोत्री हाईवे चौड़ीकरण में झाला से भैरों घाटी के बीच करीब 20 किमी के दायरे में कटने वाले देवदार के पेड़ों को लेकर सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार गंभीर है।
पर्यावरण विदों के पत्र का संज्ञान लेती हुए सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार उत्तरकाशी के सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरण विद सुरेश भाई
के पत्र का संज्ञान लेते हुए बीआरओ से एक सप्ताह में सड़क चौड़ीकरण में कटने वाले देवदार के हरे पेड़ों की संख्या बताने के निर्देश जारी किए है ।
बता दें कि ऑल वेदर सड़क परियोजना के तहत झाला से भैरव घाटी तक करीब 20 किमी में देवदार के पेड़ों को बचाने को लिए पर्यावरण विदों ने 7 दिसंबर 2025 को तीसरी बार हिमालय है तो हम है के संदेश के साथ देवदार के पेड़ों पर रक्षासूत्र बांधे थे। मीडिया में प्रकाशित सूचना के अनुसार काटे जाने करीब 7000 पेड़ों में से कुल 1413 पेड़ों को ही नुकसान होने की खबर मिली थी। जिसकी सच्चाई को जानने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरण विद सुरेश भाई उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य से मुलाकात की थी लेकिन डीएम ने आधिकारिक जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद नितिन गडकरी केंद्रीय मंत्री, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और भूपेंद्र यादव केंद्रीय मंत्री पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन से संपर्क किया गया। जिसमें उन्हें 2024- 25 में भेजे गये चार पत्रों के उत्तर में सीमा सड़क संगठन को देवदार के पेड़ों को बचाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिये गये थे। इसके बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
उसके बाद पर्यावरण विदों ने पुनः पत्र भेजा गया। जिसमें कहा गया था कि जब सड़क की चौड़ाई पूर्व में निर्धारित 18- 24 मी० से घटकर 11 मी० हो गई है तो देवदार के पेड़ों को भी कम नुकसान होना चाहिए। जिसकी सूचना लिखित रूप से सीमा सड़क संगठन और वन विभाग से मांगी जा रही है। पत्र का संज्ञान लेकर केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय द्वारा बीआरओ एक सप्ताह के अंदर जानकारी देने का आदेश दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि पर्यावरण विदों ने पिछले दो वर्षों में दिए गए पत्रों में जिसमें खासकर सुखी से सड़क मार्ग को यथावत रखने और देवदार के कम से कम पेड़ों को नुकसान हो इसके लिए एक नए वैकल्पिक मार्ग का सुझाव भी दिया गया है। जिसमें मांग की गई थी कि सुखी, जसपुर, झाला होते हुए पुराली, बागोरी, हर्षिल और मुखवा से लेकर जांगला तक नए मार्ग के निर्माण पर भी सुझाव दिए गए थे।
इस संबंध में स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने भी मंत्रालय को पत्र भेजे थे। वर्तमान में भागीरथी इको सेंसेटिव जोन में आपदा के कारण जो चिंता जनक स्थिति पैदा हुई है उसके बाद यहां के जंगल, मिट्टी, पानी, ग्लेशियर को बचाने के लिए देश भर के संगठन एक साथ एकत्रित हो गए हैं। भविष्य में सीमा सड़क संगठन और वन विभाग को मिलकर गंभीरता पूर्वक विचार करने की आवश्यकता है ताकि मजबूत सड़क भी बने और यहां के संवेदनशील पर्यावरण को देखते हुए आपदा न्यूनीकरण के विषय पर जिम्मेदारी से काम हो सके।
हिन्दुस्थान समाचार / चिरंजीव सेमवाल



