हर्षोल्लास के साथ मनाया गया घुघुतिया और उत्तरायणी पर्व

देहरादून, 14 जनवरी (हि.स.)। उत्तराखंड की लोक संस्कृति, आस्था और परंपराओं का प्रतीक घुघुतिया और उत्तरायणी पर्व आज पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पवित्र नदियों में लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई।

मकर संक्रांति के मौके पर पिथौरागढ़ में घुघुतिया पर्व की धूम रही। सुबह सुबह बच्चों ने गुड़, घी और आटे से बने घुघुते कौवों को खिलाए और लोकगीत गाते हुए घर-घर खुशियों का संदेश दिया। लोक मान्यता है कि कौवा देवताओं का दूत होता है और उसे भोजन कराने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

इस संबंध में गीतिका पंत ने बताया कि मकर संक्रांति के एक दिन पहले हर घर में आटे, गुड और घी से घुघुते के साथ ही अन्य तरह के पकवान बनाए जाते हैं। जिसका अगले दिन यानी उत्तरायणी की सुबह सबसे पहले कौवो को भोग लगाया जाता है। यह पर्व नई फसल के आगमन और सूर्य के उत्तरायण होने का भी प्रतीक है। प्रकाश पांडे बताते हैं कि यह सिर्फ लोक उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति, पक्षियों और मानव के सहअस्तित्व का संदेश देने वाला पर्व है।

घुघुतिया और उत्तरायणी पर्व एक बार फिर यह साबित करते हैं कि कुमाऊँ की लोकपरंपराएं आज भी लोगों के जीवन में जीवंत हैं और पीढ़ियों को जोड़ने का काम कर रही हैं। लोक संस्कृति और आस्था का यह पर्व न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता और प्रकृति से जुड़ाव का संदेश भी देता है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल