गायत्री परिवार युग चेतना का प्रवाह: मुख्यमंत्री

-गायत्री परिवार का शताब्दी समारोह नवयुग निर्माण में मील का पत्थर: शेखावत

-ध्वज वंदन के साथ शताब्दी समारोह का शुभारंभ

हरिद्वार, 18 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गायत्री परिवार को किसी एक संगठन की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। यह युग चेतना का वह प्रवाह है, जो व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र के उत्थान की ओर अग्रसर करता है।

रविवार को अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज के तत्वावधान में आयोजित माता भगवती देवी शर्मा व अखंड दीपक के शताब्दी समारोह का शुभारंभ ध्वज वंदन के साथ श्रद्धामय वातावरण में हुआ। यह कार्यक्रम 23 जनवरी तक चलेगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने माताजी के तपस्वी जीवन, निःस्वार्थ सेवा और अखंड साधना को राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि शताब्दी समारोह भारतीय संस्कृति, संस्कार और साधना परंपरा के नवजागरण का संदेश देता है।

उनका संपूर्ण जीवन त्याग, बलिदान और साधना की वह ज्योति है, जिसने असंख्य जीवनों को सही दिशा और नई दृष्टि दी।

मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक चेतना का स्मरण करते हुए कहा कि ऐसे पावन परिवेश में आयोजित यह शताब्दी समारोह भारतीय संस्कृति, संस्कार और साधना परंपरा के नवजागरण का संदेश देता है।

केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने इसे सेवा, साधना और संस्कार का त्रिवेणी संगम बताते हुए नवयुग निर्माण में मील का पत्थर करार दिया। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि यह समारोह व्यक्ति और समाज में आत्मपरिवर्तन का अवसर प्रदान करता है।

समारोह में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, राज्य मंत्री विनय रुहेला, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, विधायकों और विदेशों सहित भारत के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंतिम चरण में विशिष्ट अतिथियों को शांतिकुंज का प्रतीक चिह्न, गंगाजली, रुद्राक्ष माला और युग साहित्य से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सेवा, साधना और संस्कार का त्रिवेणी संगम यह शताब्दी समारोह नवयुग के बारेनिर्माण में मील का पत्थर साबित होगा। विश्व की महान सभ्यताओं का निर्माण सामूहिक चरित्र निर्माण के माध्यम से ही संभव हुआ है। जब समाज के व्यक्ति नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सेवा भाव को अपने जीवन का आधार बनाते हैं, तभी सशक्त संस्कृति और स्थायी सभ्यता का निर्माण होता है। जनशताब्दी समारोह इसी सामूहिक चेतना को जाग्रत करने का एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।

शताब्दी समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि यह आयोजन किसी वैराग्यपूर्ण एकांत तपोभूमि का नहीं, बल्कि युगऋषि आचार्यश्री का खोया-पाया विभाग है। जहां व्यक्ति स्वयं को और अपने दायित्व को पुनः खोजता है।

उन्होंने कहा कि यह अवसर सौभाग्य का द्वार खोलता है और जनसमूह से आत्मपरिवर्तन को ही सामाजिक परिवर्तन की पहली शर्त बताया। डॉ. पंड्या ने बताया कि जब व्यक्ति स्वयं बदलने का साहस करता है, तभी राष्ट्र और समाज के नवनिर्माण की नींव मजबूत होती है। शताब्दी समारोह का उद्देश्य इसी चेतना को जाग्रत करना और विचार, आचरण तथा कर्म में सकारात्मक बदलाव लाना है।

इस अवसर पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, राज्य मंत्री विनय रुहेला, सुरेश चव्हाण, ईडी के पूर्व निदेशक राजेश्वर सिंह सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने विशिष्ट अतिथियों सहित न्यायाधीश परविन्दर सिंह, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, स्वामी सम्पूर्णानंद, स्वामी वेलु बापू, के नारायण राव, रमेश भट्ट, दिनेश काण्डपाल, आचार्य डॉ दयाशंकर विद्यालंकार आदि को शांतिकुंज का प्रतीक चिह्न, गंगाजली, रुद्राक्ष की माला और युग साहित्य आदि भेंट कर सम्मानित किया गया।

शताब्दी समारोह कार्यक्रम में विधायक हरिद्वार मदन कौशिक, राज्य मंत्री श्यामवीर सैनी, राज्य देशराज कर्णवाल, राज्य मंत्री शोभाराम प्रजापति, जिला अध्यक्ष भाजपा आशुतोष शर्मा, पूर्व विधायक संजय गुप्ता, उपाध्यक्ष भाजपा लव शर्मा, श्रीगंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम, मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्र सहित अमेरिका, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों तथा भारत के कोने कोने से आए हजारों स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला