
हरिद्वार, 18 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत का वास्तविक विकास केवल भौतिक प्रगति तक सीमित नहीं हो सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि सांस्कृतिक चेतना, नैतिक मूल्य और आध्यात्मिक संतुलन के बिना कोई भी विकास पूर्ण नहीं माना जा सकता।
मंत्री ने आगे कहा कि वर्तमान पीढ़ी को न केवल विकास का सहभागी होना चाहिए, बल्कि भारतीय संस्कृति का संवाहक भी बनना आवश्यक है, क्योंकि यही भारत की विशिष्ट पहचान, आंतरिक शक्ति और विश्व को दिया जाने वाला सबसे बड़ा योगदान है।
रविवार को हरिद्वार में अखिल भारतीय गायत्री परिवार के शताब्दी समारोह में शेखावत ने उल्लेख किया कि विदेशी आक्रांताओं ने हजारों वर्षों तक भारत की दिव्य संस्कृति और सभ्यता को नष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन हमारे पूर्वजों ने साहस, तप और बलिदान के माध्यम से इस संस्कृति की ज्योति को जीवित रखा। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक शासन के दौरान भारतीय समाज को उसकी जड़ों से काटने का सुनियोजित प्रयास हुआ, और इतिहास व शिक्षा प्रणाली को इसी दृष्टिकोण से आकार दिया गया, जिससे सांस्कृतिक आत्मगौरव कम होता गया।
उन्होंने यह भी कहा कि लगभग 450–500 वर्ष पहले राम मंदिर के विध्वंस के साथ भारत के सौभाग्य का सूर्य अस्त हो गया था, लेकिन अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास के दिन देश और दुनिया में भारत के भाग्योदय की नई किरण दिखाई देने लगी।
शेखावत ने कहा कि पिछले 100–150 वर्षों के दौरान जब भारतीय समाज चेतना-शून्यता और दुविधा की स्थिति में था, तब गायत्री परिवार के संस्थापक गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य ने आध्यात्मिक चेतना का पुनर्जागरण किया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव की सौ वर्षीय साधना, अखंड दीपक के 100 वर्ष तथा वंदनीया माताजी के जन्म शताब्दी वर्ष का यह संगम केवल तिथियों का संयोग नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक चेतना के नवजागरण का प्रतीक है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गुरुदेव की साधना यह सिखाती है कि साधना केवल व्यक्तिगत आत्मोद्धार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जब इसे जीवन का अनुशासन बनाया जाता है, तो यह समाज और राष्ट्र को दिशा प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि अखंड दीपक सत्य, सेवा और संकल्प का ऐसा प्रतीक है, जो पीढ़ियों के परिवर्तन के बावजूद निरंतर जलता रहता है। वहीं, वंदनीया माताजी का जीवन भारतीय मातृशक्ति की मौन, करुणामयी और त्यागपूर्ण शक्ति का जीवंत उदाहरण है, जो समाज में गहरे परिवर्तन की क्षमता रखती है।
शेखावत ने कहा कि गायत्री परिवार ने अपने सौ वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक समरसता, नारी सशक्तीकरण, पर्यावरण संरक्षण, युवा निर्माण और सांस्कृतिक चेतना जैसे क्षेत्रों में लगातार, अनुशासित और सुसंगत प्रयास किए हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला



