मकर संक्रांति : हरिद्वार में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, पांच लाख श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी

मकर संक्रांति स्नान के लिए प्रशासन ने किए थे समुचित सुरक्षा व सुविधा के प्रबंध

हरिद्वार, 14 जनवरी (हि.स.)। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर बुधवार काे देश के कई प्रांतों से आए पांच लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया और मोक्ष की कामना की। घना कोहरा और कड़कड़ाती ठंड भी श्रद्धालुओं की आस्था को नहीं डिगा सकी। श्रद्धा के सामने ठंड बाैनी नजर आई। भोर सुबह से आरम्भ हुआ स्नान का सिलसिला अनवरत शाम तक जारी रहा। इस दाैरान प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा के समुचित इंतजाम किए थे।

आज मकर संक्रांति पर्व पर कड़कड़ाती ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। स्नान के लिए श्रद्धालुओं का गंगा घाटों पर भोर सुबह से ही पहुंचना आरम्भ हो गया। घने कोहरे के बीच श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान और दान पुण्य कर पुण्य लाभ कमाया और सुख समृद्धि की कामना की।

जिला प्रशासन और पुलिस ने स्नान पर्व को सकुशल संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। मेला क्षेत्र को 8 जोन और 22 सेक्टरों में बांटकर सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी। सभी सेक्टर और जोनों में सेक्टर मजिस्ट्रेट और जोनल ऑफिसर की तैनाती की गई। पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती के साथ ही पीएसी, डॉग स्क्वायड, बम निरोधक दस्ते की तैनाती भी की गई। सीसीटीवी के माध्यम से भी निगरानी की गयी। घाटों पर गोताखोरों और जल पुलिस की टीमें मुस्तैद रहीं, जबकि आपात स्थिति से निपटने के लिए चिकित्सा शिविर, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की व्यवस्था भी की गई।

जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने शाम काे बताया कि मकर संक्रांति स्नान पर्व पूरे धार्मिक वातावरण मेंसंपन्न हाे गया। आज सायं आरती दर्शन तक 4 लाख 90 हजार श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी एवं अन्य विभिन्न घाटों पर स्नान किया।

सनातन धर्म में मकर संक्रांति पर गंगा स्नान के बाद देव दर्शन और खिचड़ी, गुड़ से बनी मिठाई, तिल, गर्म वस्तुओं का दान करने का विशेष महत्व है। जिसका आज श्रद्धालु पूरी आस्था से पालन करते दिखे। सूर्य देव मकर संक्रांति पर धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तथा दक्षिण से उत्तरायण होते हैं। इस कारण से मकर संक्रांति को उत्तरायणी पर्व भी कहा जाता है। इस दिन भगवान सूर्य देव की उपासना का विशेष महत्व है। गंगा स्नान और भगवान सूर्य को जल अर्पित करने से सभी मनोकामनाएं भी सिद्ध होती हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला