उत्तराखंड में एक पखवाड़े की देरी से पहुंचे प्रवासी पक्षी
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- Jan 08, 2026

हरिद्वार, 08 जनवरी (हि.स.)। उत्तराखंड में सर्दियों के दौरान आने वाले विदेशी प्रवासी पक्षी इस वर्ष लगभग 15 से 18 दिन की देरी से पहुंचे हैं।
पक्षी वैज्ञानिकों के अनुसार, इसका मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और लंबे मानसून के बाद नवम्बर–दिसम्बर में बारिश व बर्फबारी का न होना है।
आमतौर पर रूस, मध्य एशिया, स्कैंडिनेवियाई और यूरोपीय देशों से प्रवासी पक्षी नवम्बर–दिसम्बर में हरिद्वार के नीलधारा तट सहित उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचते हैं, लेकिन इस बार उनका आगमन देर से हुआ।
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पूर्व डीन व अंतर्राष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक डॉ. दिनेश भट्ट के अनुसार अत्यधिक ठंड और बर्फबारी के कारण भोजन की कमी होने पर पक्षी हजारों किलोमीटर उड़कर अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्रों में आते हैं, जहां भोजन और धूप प्रचुर मात्रा में मिलती है। वसंत ऋतु में तापमान बढ़ने पर वे फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में अपने मूल स्थान लौट जाते हैं। भारत में अधिकतर प्रवासी पक्षी सेंट्रल फ्लाईवे मार्ग का उपयोग करते हैं।
पिछले कुछ वर्षों से साइबेरियाई क्रेन का उत्तराखंड न आना चिंता का विषय है। इसके पीछे ग्लोबल वाॅर्मिंग, प्राकृतिक आपदाएं, मानव गतिविधियों में वृद्धि और रूस–यूक्रेन संघर्ष को भी कारण माना जा रहा है। लगातार युद्ध, प्रदूषण और रेडिएशन ने पक्षियों की आवाजाही को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों ने चेताया कि संरक्षण के ठोस कदम न उठाए गए तो कई प्रवासी पक्षी भविष्य में अपना पारंपरिक मार्ग बदल सकते हैं या विलुप्त हो सकते हैं।
उत्तराखंड में हरिद्वार, देहरादून, ऋषिकेश, पौड़ी, राजाजी व कॉर्बेट टाइगर रिजर्व सहित कई क्षेत्रों में रूडी शेल्डक, बार-हेडेड गूज, ब्लैक स्टॉर्क, हॉर्नबिल आदि प्रजातियां देखी जा रही हैं। पक्षी प्रेमियों के लिए 31 जनवरी से 1 फरवरी तक कोटद्वार-लैंसडाउन में सनेह पक्षी महोत्सव का आयोजन भी किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला



