एक दशक में बदला भारतीय खेलों का इतिहास, स्वर्णिम अध्याय बना यह दौर: मुख्यमंत्री

-मुख्यमंत्री ने नेशनल पैरालंपिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप का किया शुभारंभ

देहरादून, 16 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को नेशनल पैरालंपिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि बीते एक दशक में भारत के खेल इतिहास में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है और यह अवधि भारतीय खेलों के लिए स्वर्णिम अध्याय बन चुकी है।

रुड़की स्थित कोर यूनिवर्सिटी में उद्घाटन समारोह को वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पावरलिफ्टिंग अनुशासन, धैर्य, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक है। यह खेल न केवल शारीरिक शक्ति बल्कि हौसले और आत्मसम्मान की भी मिसाल पेश करता है।

उन्होंने भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर सहित अवनी लखेरा, सुमित अंतिल, शीतल देवी और सत्येंद्र सिंह लोहिया जैसे खिलाड़ियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पेरिस पैरालंपिक 2024 में भारत ने 29 पदक जीतकर इतिहास रचा। वहीं, 2025 में दुबई में आयोजित एशियन यूथ पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने 110 पदक हासिल कर देश की क्षमता का प्रदर्शन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत अब केवल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाला देश नहीं रहा, बल्कि जीत के इरादे से मैदान में उतरता है। इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्पष्ट सोच और मजबूत नीतियां हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में खेल बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और ‘खेलो इंडिया’ अभियान से खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ खेल अवसंरचना भी मजबूत हुई है।

कार्यक्रम में पद्मश्री और खेल रत्न डॉ. दीपा मलिक, पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया के महासचिव जयवंत हम्मुनावा, इंडिया पैरा पावरलिफ्टिंग के चेयरपर्सन जे.पी. सिंह सहित विभिन्न राज्यों से आए खिलाड़ी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला