आईआईटी कानपुर की प्रो. बुशरा अतीक को जीडी बिरला वैज्ञानिक अनुसंधान पुरस्कार 2025
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- Jan 08, 2026
कानपुर, 08 जनवरी (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर की प्रो. बुशरा अतीक, जैविक विज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग में प्रोफेसर तथा अंतरराष्ट्रीय सम्बंधों की डीन को जैविक विज्ञान के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए 35वां जीडी बिरला वैज्ञानिक अनुसंधान पुरस्कार (2025) प्रदान किया गया है। यह जानकारी गुरुवार को आईआईटी कानपुर निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने दी।
वर्ष 1991 में केके बिरला फाउंडेशन द्वारा स्थापित जीडी बिरला वैज्ञानिक अनुसंधान पुरस्कार देश के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सम्मानों में से एक है। यह पुरस्कार भारत में कार्यरत 50 वर्ष से कम आयु के उन उत्कृष्ट भारतीय वैज्ञानिकों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के किसी भी क्षेत्र में मौलिक और उच्च प्रभाव वाला योगदान दिया हो। इस पुरस्कार के अंतर्गत पांच लाख की नकद राशि प्रदान की जाती है और इसकी चयन प्रक्रिया अत्यंत कठोर एवं चयनात्मक मानी जाती है।
इस पुरस्कार का चयन एक विशिष्ट चयन बोर्ड द्वारा किया जाता है, जिसकी अध्यक्षता भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए), नई दिल्ली के अध्यक्ष करते हैं। वर्तमान में आईएनएसए के अध्यक्ष प्रो. अशुतोष शर्मा हैं। चयन बोर्ड में देश के कई प्रख्यात वैज्ञानिक शामिल होते हैं।
प्रो. बुशरा अतीक डीबीटी–वेलकम ट्रस्ट इंडिया अलायंस की सीनियर फेलो हैं और आईआईटी कानपुर में एक अत्यंत ट्रांसलेशनल बायोमेडिकल अनुसंधान कार्यक्रम का नेतृत्व कर रही हैं, जिसका उद्देश्य कैंसर रोगियों के लिए अगली पीढ़ी की निदान एवं उपचार रणनीतियों का विकास करना है। उनके अग्रणी शोध कार्यों ने विशेष रूप से प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल कैंसर की समझ को नई दिशा दी है और उपचार पद्धतियों को पुनर्परिभाषित किया है। उनके शोध में दर्शाया गया कि एडवांस्ड प्रोस्टेट कैंसर में व्यापक रूप से प्रयुक्त एंटी-एंड्रोजन दवाएं हानिकारक हो सकती हैं। उन्होंने केसिन किनेज़-1 अवरोधकों को प्रभावी सहायक उपचार के रूप में पहचाना, प्रोस्टेट कैंसर के एक उपसमूह के बढ़े हुए स्तर के पीछे के नए तंत्रों को उजागर किया। साथ ही डब्लूएचओ द्वारा अनुमोदित मलेरिया-रोधी दवा आर्टेमिसिनिन का पुनः उपयोग कर कैस्ट्रेट-रेज़िस्टेंट प्रोस्टेट कैंसर में दवा संवेदनशीलता बहाल करने का मार्ग प्रशस्त किया।
अनुसंधान के साथ-साथ प्रो. अतीक आईआई कानपुर में डीन, अंतरराष्ट्रीय सम्बंध के रूप में भी महत्वपूर्ण नेतृत्व भूमिका निभा रही हैं, जहां वे वैश्विक शैक्षणिक साझेदारियों को सुदृढ़ करने और विश्व के अग्रणी संस्थानों के साथ सहयोग को बढ़ावा दे रही हैं। प्रो. अतीक ने अपनी शैक्षणिक यात्रा उत्तर प्रदेश के बरेली से आरम्भ की और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने एम्स और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी, नई दिल्ली में अनुसंधान कार्य किया तथा मैकगिल यूनिवर्सिटी, मॉन्ट्रियल और यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन, एन आर्बर में पोस्ट-डॉक्टोरल शोध किया। उन्होंने वर्ष 2013 में आईआई कानपुर में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप



