बायोरेमेडिएशन कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं : नगर आयुक्त
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- Jan 05, 2026
कानपुर, 05 जनवरी (हि.स.)। प्रत्येक स्थल पर दैनिक जल निकासी माप पुस्तिका रखी जाए, जिस पर संबंधित जोनल अभियंता के प्रतिदिन हस्ताक्षर हों। साथ ही रोजाना डाले जाने वाले एंजाइम, बैक्टीरिया एवं रसायनों का रिकॉर्ड रखने तथा जियोटैग फोटो भी प्रस्तुत की जाए। इसके अलावा प्रत्येक नाले पर टेस्टिंग विश्लेषण पुस्तिका के नियमित रख-रखाव के भी आदेश दिए गए। यह निर्देश सोमवार को नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने दिए।
गंगा नदी में दूषित जल के प्रवाह की लगातार मिल रही शिकायतों का संज्ञान लेते हुए आज नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने रानीघाट स्थित बायोरेमेडिएशन स्थल का जायजा लिया। इसका उद्देश्य गंगा में प्रवाहित हो रहे नालों के जल की गुणवत्ता और बायोरेमेडिएशन प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति का आकलन करना रहा।
इस दौरान जोनल अभियंता-4 मीनाक्षी अग्रवाल, अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ राहुल अवस्थी तथा कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
मौके पर रानीघाट में बायोरेमेडिएशन का कार्य क्रियाशील पाया गया। अधिकारियों ने बताया कि गंगा नदी में रानीघाट, गोलाघाट, रामेश्वर घाट, सत्तीचैरा घाट, डबका नाला, गुफ्तार घाट एवं परमिया नाला सहित कुल सात नालों का जल बायोरेमेडिएशन के माध्यम से प्रवाहित किया जा रहा है। वहीं गंदा नाला, हलवाखाड़ा नाला, पनकी थर्मल नाला, अर्रा-बिनगवां नाला, सागरपुरी नाला एवं पिपौरी नाला सहित छह नालों का जल पांडु नदी में प्रवाहित किया जा रहा है।
जोनल अभियंता ने जानकारी दी कि बायोरेमेडिएशन एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें सूक्ष्म जीवों की सहायता से प्रदूषकों को विघटित किया जाता है। ट्रायल अवधि के अंत तक बीओडी और सीओडी में 40 प्रतिशत तथा ट्रायल के बाद 70 प्रतिशत तक कमी का लक्ष्य निर्धारित है। जल गुणवत्ता जांच के लिए नमूने सीएसआईआर को भेजे गए हैं। हालांकि निरीक्षण के समय प्रत्येक स्थल पर संधारित किए जाने वाले रजिस्टर मौके पर नहीं पाए गए।
इस दौरान रानीघाट बायोरेमेडिएशन स्थल के पास कूड़े के ढेर पाए गए। इस पर नगर आयुक्त ने सफाई नायक रज्जब अली को तत्काल कूड़ा उठान कर जियोटैग फोटो भेजने और प्रतिदिन उच्चस्तरीय साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप



