ज्यादा एंटीबायटिक दवाओं के सेवन से अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान : सतीश राय

--प्रधानमंत्री ने भी एंटीबायोटिक दवाओं के ज्यादा सेवन पर की है चिंता

प्रयागराज, 05 जनवरी (हि.स)। प्रधानमंत्री मोदीजी ने 28 दिसम्बर को जनमानस के स्वास्थ्य पर मन की बात कार्यक्रम में एंटीबायोटिक दवाओं के ज्यादा इस्तेमाल पर चिंता जाहिर की थी। इस दवा के ज्यादा इस्तेमाल से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है।

कड़ाके की ठंड और शीत लहर के चपेट में आने से कमजोर इम्यूनिटी के लोगों में सर्दी खांसी बुखार का प्रकोप बढ़ जाता है। ऐसे में अपने जीवन शैली में प्राकृतिक उपायों को अपना कर शरीर को कड़ाके की ठंड से जूझने के लिए तैयार करें।

यह बातें एसकेआर योग एवं रेकी शोध प्रशिक्षण और प्राकृतिक संस्थान की ओर से प्रयागराज रेकी सेंटर पर सोमवार को सुबह जाने-माने स्पर्श चिकित्सक सतीश राय ने कार्यक्रम में आए लोगों को सम्बोधित करते हुए कही।

--ग्रन्थों में स्पर्श चिकित्सा का वर्णन

उन्होंने कहा कि एलोपैथिक, आयुर्वेद और होम्योपैथिक चिकित्सा के जमाने में स्पर्श चिकित्सा से कम लोग ही परिचित होंगे। जब कि पुराने और धार्मिक ग्रंथों में स्पर्श चिकित्सा का स्पष्ट वर्णन मिलता है। इसे अपनाकर बिना धन व्यय किए और खान-पान में सुधार कर रोगों से मुक्ति पाई जा सकती है।

--खाने में लापरवाही से बढ़ रही बीमारियां

सतीश राय ने कहा कि खाने में लापरवाही के कारण लोगों में बीमारियां बढ़ रही हैं। 90 के दशक में प्रति व्यक्ति तेल की खपत 20 ग्राम थी, वर्ष में 7 किलो तेल ही खाते थे। जबकि वर्ष 2024 तक फास्ट फूड, समोसा, जलेबी, पाव-भाजी, बर्गर, चाऊमीन, पिज्जा खाने से प्रति व्यक्ति 55 ग्राम तेल व वर्ष में 20 किलो तेल-घी की खपत बढ़ने से लोगों में मोटापे एवं अन्य बीमारियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। लोगों में मोटापा वर्ष 1990 में 3 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2024 तक 35 करोड़ हो गया है।

--मेडिसिन एवं ड्रग से बीमारी सिर्फ कंट्रोल

सतीश राय ने कहा कि लोग मोटापे से परेशान एवं बीमारियों से ठीक होने के लिए लोग दवा खाते हैं। जबकि मेडिसिन एवं ड्रग किसी भी बीमारी को ठीक नहीं करता, वह सिर्फ कंट्रोल करता है और ज्यादा एंटीबायोटिक दवा खाने से शरीर में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया धीरे-धीरे मजबूत होने लगते हैं। अर्थात इसे मल्टीक्षय ड्रग रेजिस्टेंस (Multi Drug Resistant) कहते हैं। तब यह दवा का असर शरीर में काम करना बंद कर देती है।

अंत में स्पर्श चिकित्सक ने कहा कि ज्यादा एंटीबायोटिक

दवाओं के सेवन से पेट, आंतों, लीवर से जुड़े अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचता है जो त्वचा पर रेशे खुजली के रूप में प्रकट होती है। WHO का दावा है कि प्रतिवर्ष करीब एक करोड़ लोगों की मौत एंटीबायोटिक दवाओं के असर नहीं होने से होती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र