इस्लामाबाद, 21 जनवरी (हि.स.)। पाकिस्तान के इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल एंड पॉलिसी साइंसेज की ताजा रिपोर्ट ने संघीय सरकार की शिक्षा आपात नीति की पोल खो दी है।रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 2.5 करोड़ ( 25 मिलियन) बच्चे अभी भी स्कूल से बाहर हैं। देश में शिक्षा पर कुल खर्च 5 खरब (500 बिलियन रुपये) तक पहुंच गया है। इस खर्च का बड़ा हिस्सा अब सरकार के बजाय आम पाकिस्तानी परिवार उठा रहे हैं।
दुनिया न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल एंड पॉलिसी साइंसेज ने कहा कि देश के इतिहास में यह पहली बार है कि शिक्षा पर परिवारों का खर्च सरकार के शिक्षा बजट से ज्यादा हो गया है। रिपोर्ट के 15वें संस्करण के अनुसार, 25 मिलियन से ज्यादा बच्चे शिक्षा से वंचित हैं।
आंकड़े बताते हैं कि जनता शिक्षा पर 280 अरब रुपये खर्च कर रही है, जबकि सरकारी निवेश घटकर 220 अरब रुपये हो गया है। नतीजतन, शिक्षा का 56 प्रतिशत वित्तीय बोझ जनता उठा रही है और सिर्फ 44 प्रतिशत सरकार उठा रही है। माता-पिता प्राइवेट स्कूलों की फीस पर 1,31,0 अरब रुपये , कोचिंग और ट्यूशन पर 613 अरब रुपये और शिक्षा से जुड़े अन्य निजी खर्चों पर 878 अरब रुपये खर्च करने के लिए मजबूर हैं।
इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल एंड पॉलिसी साइंसेज के कार्यकारी निदेश डॉ. सलमान हुमायूं ने कहा कि जब शिक्षा पर परिवारों का खर्च सरकारी निवेश से ज्यादा हो जाता है, तो यह एक गंभीर समानता संकट का संकेत देता है। विश्व बैंक की वरिष्ठ शिक्षा विशेषज्ञ अजा फारुख के अनुसार, प्राइवेट स्कूलों का बढ़ता चलन इस बात का सबूत है कि परिवार सरकारी शिक्षा के दायरे से बाहर निकलना पसंद कर रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद



