वीबी–जी राम जी कानून से ग्रामीण विकास को मिलेगी रफ्तार, हिमाचल को होगा फायदा : राजीव बिंदल
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- Jan 07, 2026
शिमला, 07 जनवरी (हि.स.)। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की एनडीए सरकार ने ग्रामीण भारत के लिए एक नई और दूरदर्शी रोजगार योजना शुरू की है, जिससे हिमाचल प्रदेश के गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। शिमला में बुधवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि संसद के शीतकालीन सत्र में पारित विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी–जी राम जी अधिनियम, 2025 केवल रोजगार देने की योजना नहीं है, बल्कि इसे गांवों के समग्र विकास से जोड़ा गया है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि आज़ादी के बाद से देश में ग्रामीण रोजगार के लिए कई योजनाएं चलाई गईं। वर्ष 1960–61 में रूरल मैनपावर प्रोग्राम से लेकर वर्ष 2005 में शुरू हुई मनरेगा तक सरकारों ने समय–समय पर प्रयास किए। मनरेगा के तहत 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी थी, लेकिन वास्तविकता में औसतन लगभग 50 दिन का ही रोजगार मिल पाया। बदलती जरूरतों और अनुभवों को देखते हुए एक नई और अधिक प्रभावी योजना की आवश्यकता महसूस की गई, जिसके तहत वीबी–जी राम जी अधिनियम लाया गया।
उन्होंने बताया कि नई योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है। खास बात यह है कि रोजगार को गांवों के विकास कार्यों से जोड़ा गया है। ग्राम सभा स्तर पर गांव का विकास प्लान बनेगा, जो ब्लॉक और जिला स्तर से होते हुए पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म से जुड़ेगा। उसी योजना के अनुसार काम होंगे और उसी से रोजगार सृजित किया जाएगा, ताकि गांवों में स्थायी विकास हो सके।
डॉ. बिंदल ने कहा कि यह योजना पूरी तरह तकनीक आधारित है। इसमें बायोमेट्रिक हाजिरी, डिजिटल निगरानी, छह महीने में समीक्षा और समयबद्ध भुगतान का प्रावधान रखा गया है। अगर किसी को समय पर काम या भुगतान नहीं मिलता है, तो मुआवजे का भी प्रावधान है, जिससे जवाबदेही तय होगी।
फंडिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस भ्रम फैला रही है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य का फंडिंग अनुपात 90:10 रखा गया है, जो प्रदेश के लिए बड़ा लाभ है। अन्य राज्यों में यह अनुपात 60:40 है। केंद्र सरकार ने राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की है।
आंकड़ों का हवाला देते हुए डॉ. बिंदल ने कहा कि यूपीए सरकार के समय 2006 से 2014 तक मनरेगा पर करीब 2.13 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि मोदी सरकार ने 2014 से 2025 के बीच 8.53 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए। रोजगार सृजन के मामले में यूपीए के दौरान 1660 मिलियन मंडेज बने, जबकि एनडीए सरकार के दौरान 3210 मिलियन मंडेज सृजित हुए। पूर्ण किए गए कार्यों की संख्या भी यूपीए काल में 153 लाख और एनडीए काल में 862 लाख रही।
हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान प्रदेश में 16.52 लाख मंडेज बने थे, जबकि मोदी सरकार के समय यह आंकड़ा बढ़कर 32.6 लाख मंडेज हो गया, यानी रोजगार सृजन दोगुना हुआ। नई वीबी–जी राम जी योजना के लिए लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा



