आईआईटी खड़गपुर के प्रो. अभिजीत मुखर्जी को अंतरराष्ट्रीय ‘एप्लाइड हाइड्रोजियोलॉजी पुरस्कार’

खड़गपुर, 13 जनवरी (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के भूविज्ञान एवं भूभौतिकी विभाग के वरिष्ठ और प्रख्यात प्रोफेसर अभिजीत मुखर्जी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का मान बढ़ाया है। उन्हें प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ हाइड्रोजियोलॉजिस्ट्स (आईएएच) द्वारा वर्ष 2025 के ‘एप्लाइड हाइड्रोजियोलॉजी अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। इस सम्मान को प्राप्त करने वाले वे पहले भारतीय वैज्ञानिक बन गए हैं।

यह प्रतिष्ठित पुरस्कार ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित एक भव्य अंतरराष्ट्रीय समारोह के दौरान मंगलवार को प्रदान किया गया। यूनाइटेड किंगडम स्थित इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ हाइड्रोजियोलॉजिस्ट्स विश्व की सबसे बड़ी भूजल विशेषज्ञ संस्था मानी जाती है, जिसका नेटवर्क 135 से अधिक देशों में फैला हुआ है। यह संस्था हर वर्ष उस वैज्ञानिक को यह सम्मान प्रदान करती है, जिसने भूजल प्रबंधन, जल संसाधनों के सतत उपयोग और वैश्विक जल संकट से निपटने के लिए उल्लेखनीय एवं व्यावहारिक योगदान दिया हो।

संस्था की ओर से जारी प्रशस्ति-पत्र में प्रो. अभिजीत मुखर्जी को एक उत्कृष्ट शिक्षाविद्, शोधकर्ता और वैश्विक दृष्टि रखने वाला वैज्ञानिक बताते हुए उनके कार्यों की विशेष सराहना की गई है। आईएएच के अनुसार, प्रो. मुखर्जी का शोध विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों में मौजूद गंभीर हाइड्रोजियोलॉजिकल (भूजल संबंधी) समस्याओं पर केंद्रित रहा है, जिनके समाधान से करोड़ों लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उनके शोध कार्यों का प्रभाव न केवल शैक्षणिक जगत तक सीमित है, बल्कि नीति निर्माण और जल प्रबंधन योजनाओं में भी व्यापक रूप से देखा गया है।

प्रो. मुखर्जी भूजल प्रदूषण, आर्सेनिक जैसी विषैली धातुओं की समस्या तथा हाइड्रोजियोकेमिकल प्रक्रियाओं पर किए गए अपने अनुसंधान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यात हैं। उनका कार्य सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

उल्लेखनीय है कि प्रो. अभिजीत मुखर्जी को इससे पूर्व भी कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है। वर्ष 2014 में उन्हें भारत सरकार द्वारा राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार प्रदान किया गया था। इसके बाद वर्ष 2020 में उन्हें विज्ञान के क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान माने जाने वाले शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, वे जियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ अमेरिका और अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन—दोनों के ‘फेलो’ चुने जाने वाले पहले भारतीय वैज्ञानिक भी हैं, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

प्रो. मुखर्जी की इस उपलब्धि पर आईआईटी खड़गपुर प्रशासन ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी है। संस्थान प्रशासन ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह सम्मान न केवल आईआईटी खड़गपुर, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। इससे भारतीय भू-विज्ञान, पर्यावरण अनुसंधान और जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

संस्थान ने विश्वास जताया कि प्रो. मुखर्जी की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित करेगी।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता