पश्चिम बंगाल में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर उलझन, उत्तराधिकारी चयन पर अड़चन
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- Jan 06, 2026
कोलकाता, 06 जनवरी (हि. स.)। पश्चिम बंगाल के वर्तमान पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त होने वाला है, लेकिन उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति को लेकर जटिलताएं सामने आ गई हैं।
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के अखिल भारतीय सेवा निदेशक नंद किशोर कुमार ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को सलाह दी है कि वह इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय से आवश्यक अनुमति लें। आयोग ने राज्य सरकार द्वारा भेजी गई आईपीएस अधिकारियों की सूची भी लौटा दी है, जिसमें से किसी एक को नया डीजीपी बनाए जाने का प्रस्ताव था।
नियमों के अनुसार, राज्य सरकार को डीजीपी पद के लिए राज्य में कार्यरत तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल भेजना होता है और संघ लोक सेवा आयोग उनमें से एक नाम को अंतिम मंजूरी देता है। इस मामले की जड़ दिसंबर 2023 में तत्कालीन डीजीपी मनोज मालवीय की सेवानिवृत्ति से जुड़ी बताई जा रही है।
मनोज मालवीय के रिटायर होने से पहले राज्य सरकार ने तीन अधिकारियों का पैनल भेजने के बजाय राजीव कुमार को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त कर दिया था। बाद में जब उनके उत्तराधिकारी के लिए नामों की सूची भेजी गई, तो आयोग ने उसे स्वीकार नहीं किया।
संघ लोक सेवा आयोग की ओर से मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में जुलाई 2018 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला दिया गया है। आदेश के अनुसार किसी भी राज्य सरकार को मौजूदा डीजीपी के सेवानिवृत्त होने से कम से कम तीन महीने पहले नए डीजीपी के लिए आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजना होता है।
इस तर्क के आधार पर पश्चिम बंगाल सरकार को सितंबर 2023 में ही पैनल भेज देना चाहिए था, क्योंकि मनोज मालवीय दिसंबर 2023 में सेवानिवृत्त हुए थे। पत्र में यह भी बताया गया है कि आयोग ने इस विषय में भारत के अटॉर्नी जनरल से सलाह ली थी, जिन्होंने भी राज्य सरकार को सर्वोच्च न्यायालय से अनुमति लेने की सिफारिश की है।
इस घटनाक्रम के बाद अब डीजीपी के उत्तराधिकारी की नियुक्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर



