विश्व में तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा हिन्दी में विश्व भाषा बनने की क्षमता : कृष्ण कुमार यादव
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- Jan 09, 2026
--पोस्टमास्टर जनरल की तीन पीढ़ियां हिन्दी में सृजनरत और वैश्विक स्तर पर कई देशों में सम्मानित
प्रयागराज, 09 जनवरी (हि.स.)। ’विश्व हिन्दी दिवस’ प्रतिवर्ष 10 जनवरी को दुनिया भर में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार और इसके अंतरराष्ट्रीय महत्व को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। 10 जनवरी 1975 को नागपुर में पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन हुआ था, जिसके उपलक्ष्य में 2006 से इसे आधिकारिक रूप से मनाया जा रहा है। हिन्दी को लेकर तमाम विद्वान, संस्थाएं, सरकारी विभाग अपने स्तर पर कार्य कर रहे हैं। इन सबके बीच पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव का अनूठा परिवार ऐसा भी है, जिनकी तीन पीढ़ियां हिन्दी की अभिवृद्धि के लिए न सिर्फ प्रयासरत हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर कई देशों में सम्मानित हैं।
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी एवं नवोदय विद्यालय तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुरा छात्र कृष्ण कुमार यादव (पोस्टमास्टर जनरल) के परिवार में उनके पिता राम शिव मूर्ति यादव के साथ-साथ पत्नी आकांक्षा यादव और दोनों बेटियां अक्षिता व अपूर्वा भी हिन्दी को अपने लेखन से लगातार नए आयाम दे रही हैं। देश-दुनिया की तमाम पत्रिकाओं में प्रकाशन के साथ कृष्ण कुमार यादव की सात और पत्नी आकांक्षा की चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिन्दी ब्लॉगिंग के क्षेत्र में इस परिवार का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अग्रणी है। ’दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दम्पति’ सम्मान से विभूषित यादव दम्पति को नेपाल, भूटान व श्रीलंका में आयोजित ’अंतरराष्ट्रीय हिन्दी ब्लॉगर सम्मेलन’ में “परिकल्पना ब्लॉगिंग सार्क शिखर सम्मान” सहित अन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है। जर्मनी के बॉन शहर में ग्लोबल मीडिया फोरम (2015) के दौरान ’पीपुल्स चॉइस अवॉर्ड’ श्रेणी में आकांक्षा यादव के ब्लॉग ’शब्द-शिखर’ को हिन्दी के सबसे लोकप्रिय ब्लॉग के रूप में भी सम्मानित किया जा चुका है। बेटी अक्षिता को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2011 में सबसे कम उम्र में ’राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है। अक्षिता को प्रथम अंतरराष्ट्रीय हिन्दी ब्लॉगर सम्मेलन, नई दिल्ली (2011) में भारत के पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ’निशंक’ ने ‘श्रेष्ठ नन्ही ब्लॉगर‘ सम्मान से अलंकृत किया, तो अंतरराष्ट्रीय हिन्दी ब्लॉगर सम्मेलन, श्रीलंका (2015) में भी अक्षिता को “परिकल्पना कनिष्ठ सार्क ब्लॉगर सम्मान” से सम्मानित किया गया।
प्रशासनिक सेवा के दायित्वों के निर्वहन के साथ कृष्ण कुमार यादव की ’अभिलाषा’ (काव्य संग्रह), ’अभिव्यक्तियों के बहाने’, ’अनुभूतियाँ और विमर्श’ (निबंध संग्रह), ’क्रांति यज्ञ : 1857-1947 की गाथा’, ’जंगल में क्रिकेट’ (बाल गीत संग्रह) एवं ’16 आने, 16 लोग’ सहित कुल सात पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता व प्रशासन के साथ-साथ सतत साहित्य सृजनशीलता हेतु शताधिक सम्मान प्राप्त श्री यादव को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और सिक्किम के राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
कृष्ण कुमार यादव का कहना है कि, सृजन एवं अभिव्यक्ति की दृष्टि से हिन्दी दुनिया की अग्रणी भाषाओं में से एक है। एथ्नोलॉग (2025) और अन्य वैश्विक रिपोर्टों के अनुसार, हिन्दी विश्व में तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, जिसके बोलने वालों की कुल संख्या लगभग 61.5 करोड़ है। दुनिया भर की 20 सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में छह भारतीय भाषाएं शामिल हैं, जिनमें हिन्दी तीसरे स्थान पर है। डिजिटल क्रान्ति के इस युग में हिन्दी में विश्व भाषा बनने की क्षमता है।
वहीं, आकांक्षा यादव का मानना है कि आज परिवर्तन और विकास की भाषा के रूप में वैश्विक स्तर पर हिन्दी के महत्व को नये सिरे से रेखांकित किया जा रहा है। हिन्दी दुनिया के 150 से अधिक देशों में बोली जाती है और 25 से अधिक देशों में हिन्दी बोलने वाले लोगों की अच्छी-खासी संख्या है। हिन्दी बोलने वालों का प्रतिशत विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 7.5 प्रतिशत है, जो कि इसे और भी महत्वपूर्ण बनाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र



