योगी सरकार के महाकुम्भ-25 का इंट्रीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बना नजीर
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- Jan 12, 2026
कमांड सेंटर ने महाकुम्भ-25 में भारी भीड़ को कंट्रोल करने के साथ 60 लाख से अधिक साइबर अटैक को किया ध्वस्त
लखनऊ, 12 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिव्य-भव्य महाकुम्भ-25 आयोजन की देश ही नहीं पूरी दुनिया ने सराहना की, जहां 45 दिनों में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। इस आयोजन को सुरक्षित बनाने के लिये यूपी पुलिस की भी देश और विदेश में तारीफ हुई। इस आयोजन को थल से लेकर नभ तक सुरक्षित बनाने के लिये यूपी पुलिस के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) ने अहम भूमिका निभाई। इस सेंटर ने जहां एक ओर जमीन पर भारी भीड़ को कंट्रोल किया, वहीं 60 लाख से अधिक साइबर अटैक को ध्वस्त किया।
नर्व सेंटर बना इंट्रीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच का ही नतीजा है कि प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ-25 को वैश्विक स्तर पर सराहना मिली और आईसीसीसी को स्कॉच गोल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया। प्रयागराज के महाकुंभ-25 को दुनिया के सबसे बड़े मानवीय समागमों में गिना गया, जहां 45 दिनों में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं, मौनी अमावस्या जैसे दिनों में असाधारण पीक-फुटफॉल, हजारों हेक्टेयर में फैली अस्थायी नगरी और अभूतपूर्व लॉजिस्टिक्स का समन्वय देखने को मिला। इस विराट आयोजन की तैयारी एक साल पहले शुरू हुई थी। इसमें “पब्लिक-फर्स्ट” चिंता और जमीन-आसमान दोनों मोर्चों पर चलती क्राइसिस-मैनेजमेंट की मशीनरी का नर्व सेंटर इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बना।
12 महीने पहले ही शुरू हुआ “वार-रूम मॉडल
महाकुम्भ-25 की तैयारी “इवेंट मैनेजमेंट” नहीं, बल्कि सिस्टम-इंजीनियरिंग थी। इसे अमलीजामा पहनाने के लिये योजना बनाने से लेकर धरातल पर उतारने के लिये एक साल पहले तैयारी शुरू की गई। इसमें टेबल-टॉप एक्सरसाइज़, परिदृश्य-आधारित परीक्षण (scenario testing) और भीड़-ओवरफ्लो जैसी स्थितियों के लिए डिजिटल-ट्विन सिमुलेशन तक शामिल था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट संदेश था कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षित अनुभव और मेले का सुचारू संचालन हो। इसके लिये कटिंग-एज टेक्नोलॉजी को जनहित में तैनात किया गया।
आपदा और प्रतिक्रिया को एक स्क्रीन पर लाया
महाकुम्भ-25 में आईसीसीसी को केंद्रीय कमांड हब की तरह डिजाइन किया गया जो चौबीसों घंटे सक्रिय रहा। इसमें भीड़-प्रबंधन, पब्लिक-सेफ्टी, आपदा-प्रतिक्रिया, ट्रैफिक-मैनेजमेंट और इंटर-एजेंसी समन्वय से लेकर रीयल-टाइम शामिल थी। इस प्रणाली में 2,750 से अधिक एआई समर्थित कैमरे, चार ऑपरेशनल आईसीसीसी यूनिट्स, 400 से अधिक कार्मिक, 1920 कॉल-सेंटर (हर शिफ्ट में 50 ऑपरेटर), जैम-प्रूफ वायरलेस ग्रिड, एएनपीआर-आधारित वाहन मॉनिटरिंग, वीएमडी डिस्प्ले, और श्रद्धालुओं की सहायता के लिए 11 भाषाओं वाला AI चैटबॉट “कुंभ शह’एआई’याक” जैसे घटक शामिल रहे। यही वह “सिंगल-पॉइंट कमांड” था जहाँ से क्यूआरटी डिस्पैच, ग्रीन-चैनल एक्टिवेशन, रेलवे-बस-स्टैंड इनफ्लो अलर्ट, और बहु-विभागीय सूचना-हैंडओवर ज़ीरो-डिले लक्ष्य के साथ चलाया गया।
जमीन पर भीड़ और ऑनलाइन “डिजिटल हमला”
महाकुम्भ-25 जितना भौतिक-रूप से बड़ा था, उतना ही “डिजिटल-फुटप्रिंट” बड़ा स्वरूप था। इसी डिजिटल निर्भरता ने इसे साइबर हमलावरों के लिए हाई-वैल्यू लक्ष्य बनाया। 45-दिवसीय आयोजन के दौरान 60 लाख से अधिक संदिग्ध साइबर हमले रोके गए, जिनके आईपी 25 प्लस देशों से ट्रेस हुए।
आईपीएस भानु भास्कर ने बताया कि महाकुम्भ की टेक-तैनाती में 56 “साइबर वॉरियर्स” द्वारा सक्रिय मॉनिटरिंग ने “डिजिटल कुम्भ” के साथ-साथ “डिजिटल सेफ्टी” को भी सुनिश्चित किया। महत्वपूर्ण बात यह रही कि साइबर-डिफेंस को केवल “आईटी-इश्यू” नहीं माना गया, बल्कि इसे भीड़-प्रबंधन, इमरजेंसी-रिस्पॉन्स और पब्लिक-ट्रस्ट से सीधे जोड़कर देखा गया।
आई जी प्रेम गौतम ( तत्कालीन आईजी रेंज प्रयागराज) द्वारा डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की संभावित कमजोरियों एवं साईबर हमलों से निपटने के लिए देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों/केंद्रीय एजेंसियों का सहयोग प्राप्त किया गया जो अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / दीपक



