अमृतसर SGPC दफ्तर पहुंची एसआईटी टीम:श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश, जांच में मिलेगा पूरा सहयोग, कोई बाधा नहीं आएगी
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- Jan 13, 2026
पावन स्वरुप मामले में अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब के स्पष्ट आदेशों के बाद एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को मामले की जांच में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) का पूरा सहयोग मिलेगा। इन आदेशों में कहा गया है कि जांच प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए और सच्चाई सामने लाने के लिए सभी संबंधित पक्ष एसआईटी का सहयोग करें। इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की टीम एसजीपीसी कार्यालय पहुंची। टीम ने जांच से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों और जानकारियों को हासिल करने के लिए यह दौरा किया। SIT ने मामले से जुड़े कुछ लोगों से पूछताछ की है और मोरिंडा में भी जांच की है। वहीं, अकाल तख्त ने सभी पक्षों को संयम बरतने और अफवाहों से बचने की चेतावनी दी है और कहा है कि कोई भी राजनीतिक दल या व्यक्ति इस मामले का राजनीतिकरण न करे। श्री अकाल तख्त साहिब का आदेश सर्वोपरि : मानन इस अवसर पर एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मानन ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश सर्वोपरि हैं और SGPC उनका पूरी निष्ठा के साथ पालन करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईटी को जांच के लिए जो भी जानकारी, रिकॉर्ड या दस्तावेजों की आवश्यकता होगी, उन्हें नियमों के तहत उपलब्ध कराया जाएगा और एसजीपीसी की ओर से जांच में किसी भी तरह की बाधा नहीं डाली जाएगी। मानन ने पारदर्शिता और सच्चाई सामने आने के महत्व पर भी जोर दिया। एआईजी जगतप्रीत सिंह ने बताया कि श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों के बाद उन्होंने आज एसजीपीसी दफ्तर में आवश्यक रिकॉर्ड की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी ने उन्हें जल्द ही सारा रिकॉर्ड मुहैया कराने का आश्वासन दिया है। पावन स्वरूप मामले की जांच कर रही एसआईटी रिकॉर्ड मिलने के बाद पूरी जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जाएगी। एआईजी ने यह भी स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड के अनुसार ही खातों और अन्य पहलुओं की जांच की जाएगी। 328 पावन स्वरूपों (श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूपों) के मामले में SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) जांच कर रही है, जो शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के समय 2015-16 में गायब हुए थे। SGPC ने पहले जांच कर 16 दोषियों को नाम किया था, लेकिन अब सरकार SIT के जरिए गायब स्वरूपों का पता लगाने में जुटी है, जिससे अकाल तख्त और सरकार के बीच मतभेद है, क्योंकि SGPC इसे धार्मिक मामला मानकर सरकार की दखलंदाजी से बचना चाहती है, जबकि सरकार कानूनी कार्रवाई और स्वरूपों की बरामदगी पर ज़ोर दे रही है। क्या है मामला? 2015-2016 के दौरान SGPC के प्रकाशन विभाग से श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पवित्र स्वरूप गायब हो गए थे, जिससे सिख समुदाय में विवाद खड़ा हो गया था। तत्कालीन SGPC ने जांच के लिए कमेटी बनाई थी, जिसने 16 लोगों को दोषी ठहराया था। अब पंजाब सरकार ने एक SIT गठित कर जांच तेज कर दी है, ताकि गायब स्वरूपों का पता लगाया जा सके और उनके मालिकाना हक का पता चले। विवाद और टकराव अकाल तख्त साहिब ने धार्मिक मामलों में राजनीतिक दखलंदाजी न करने का आदेश दिया है, लेकिन सरकार इसे धार्मिक नहीं, बल्कि कानूनी और प्रशासनिक मामला मान रही है। SGPC का कहना है कि यह सिख संस्थाओं का मामला है और सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, जबकि मुख्यमंत्री का कहना है कि यह कानूनी अधिकार है और स्वरूपों को ढूंढना जरूरी है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने SIT के गठन पर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि यह पंजाब सरकार द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।



