अमृतसर से किसान-मजदूर मोर्चा का ऐलान:लोहड़ी पर नीतियों का दहन, निजीकरण व श्रम कोड विरोध, 19 जनवरी सीएम दौरा घेराव
- Admin Admin
- Jan 12, 2026
अमृतसर में किसान-मजदूर मोर्चा ने एक बार फिर सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने अमृतसर में मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि 13 जनवरी को लोहड़ी के मौके पर होने वाले किसान-मजदूर कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आज शहर में जनसंपर्क अभियान चलाया गया। इस दौरान अमृतसर बस अड्डे पर पीआरटीसी, सरकारी रोडवेज और निजी बसों के ड्राइवरों व कर्मचारियों के सहयोग से एक रोष मार्च भी निकाला गया। पंधेर ने कहा कि बसों पर सरकार की किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ पैम्फलेट लगाए गए और लोगों से अपील की गई कि लोहड़ी के अवसर पर इन नीतियों का प्रतीकात्मक दहन किया जाए। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड का निजीकरण केवल किसानों की नहीं, बल्कि पूरे पंजाब की जनता की समस्या है। वहीं, मनरेगा के बजट में 40 प्रतिशत कटौती कर मजदूरों से रोजगार छीना जा रहा है, जिससे गरीब परिवारों पर सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीज, मार्केट और कृषि शोध जैसे अहम क्षेत्रों में कॉर्पोरेट हस्तक्षेप से देश की खेती बर्बादी की ओर जा रही है। लागू किए गए चार श्रम कोड मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला हैं। पंधेर ने पंजाब वासियों से अपील की कि ऑनलाइन व्यापार और बड़े शॉपिंग मॉल्स के कारण छोटी दुकानों के बंद होने से शहर और गांव दोनों प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए संयुक्त संघर्ष की जरूरत है। कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति, बढ़ती नशाखोरी और गोलीबारी की घटनाओं पर चिंता जताते हुए पंधेर ने केंद्र और राज्य सरकार को नाकाम बताया। उन्होंने ऐलान किया कि 19 जनवरी को मुख्यमंत्री के मजीठा दौरे का विरोध किया जाएगा। इसके अलावा 21 और 22 जनवरी को स्मार्ट मीटर बिजली घरों में जमा करवाए जाएंगे, जबकि 5 फरवरी को विधायकों और मंत्रियों के घरों के सामने रोष धरना दिया जाएगा। पंधेर ने कहा कि सरकार के साथ कई बैठकों के बावजूद मांगों का समाधान नहीं हुआ है, इसलिए आंदोलन को और तेज किया जाएगा। शंभू-खनौरी मोर्चे के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा, हड़ताली मजदूरों को मुआवजा, पराली से जुड़े मामलों को रद्द करवाना और घायल-शहीदों को न्याय दिलाना मोर्चे की प्रमुख मांगें हैं।



