सरबजीत कौर का भारत लौटना अटका:विशेष परमिट रुका, दारुल अमान लाहौर में कड़ी सुरक्षा में शिफ्ट, कानूनी प्रक्रिया जारी

भारत लौटने को लेकर सरबजीत कौर को पाकिस्तान के गृह मंत्रालय द्वारा विशेष यात्रा परमिट रोके जाने के बाद लाहौर के दारुल अमान में स्थानांतरित कर दिया गया है। यह कदम कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच उठाया गया है। सरबजीत कौर को अटारी-वाघा अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए भारत भेजा जाना था, लेकिन अंतिम समय पर पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय ने उन्हें भारत जाने की अनुमति नहीं दी। पंजाब प्रांत के गृह विभाग ने पुष्टि की है कि सरबजीत कौर को दारुल अमान में ही रखा जाएगा और जब तक भारत जाने के लिए आवश्यक परमिट जारी नहीं हो जाता, तब तक उनकी यहीं व्यवस्था रहेगी। अधिकारियों के अनुसार, यह परमिट अगले सप्ताह तक जारी होने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच, 9 जनवरी 2026 को सरबजीत कौर की मेडिकल जांच करवाई गई, जिसमें उनकी सेहत संतोषजनक पाई गई है। चिकित्सकों ने बताया कि फिलहाल उनकी स्वास्थ्य स्थिति सामान्य है और उन्हें किसी प्रकार की तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता नहीं है। लाहौर हाईकोर्ट में इस मामले की पैरवी कर रहे वकील अली चंगेजी संधू ने बताया कि सरबजीत कौर से जुड़ा मामला अभी भी कानूनी प्रक्रिया में है। उन्होंने कहा कि कोर्ट और संबंधित विभागों से लगातार संपर्क में रहकर कोशिश की जा रही है कि सभी औपचारिकताएं पूरी हों और सरबजीत कौर को जल्द से जल्द भारत भेजा जा सके। विशेष यात्रा परमिट का इंतजार, भारत-पाक मानवीय मामला संवेदनशील गौरतलब है कि सरबजीत कौर का मामला भारत और पाकिस्तान के बीच मानवीय आधार पर काफी संवेदनशील माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच रिश्तों और कानूनी प्रक्रियाओं के चलते इस तरह के मामलों में अक्सर देरी देखने को मिलती है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पाकिस्तान सरकार कब विशेष यात्रा परमिट जारी करती है, ताकि सरबजीत कौर अपने वतन भारत लौट सकें। सिलसिलेवार पढ़िए क्या था पूरा मामला...और कौन है सरबजीत कौर 1932 श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ गई थी पाकिस्तान सरबजीत कौर 4 नवंबर को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर 1932 श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ अमृतसर से अटारी बॉर्डर के जरिए पाकिस्तान गई थी। यह सिख जत्था 10 दिन तक पाकिस्तान में रहा। जहां उन्होंने सिख गुरुओं से जुड़े विभिन्न स्थलों के दर्शन किए और 13 नवंबर को भारत वापस लौट आए। पूरे सिख जत्थे के एक साथ भारत लौटने से पहले अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज और 3 महिलाओं समेत कुल 9 श्रद्धालु पहले लौट आए थे। सिख श्रद्धालुओं के साथ वापस नहीं लौटी हालांकि जब श्रद्धालुओं का पूरा जत्था वापस लौटा तो 1923 की जगह 1922 लोग ही वापस पहुंचे। जब इसकी जांच हुई तो पता चला कि जत्थे के साथ गई कपूरथला की सरबजीत कौर वापस नहीं आई है। उसका नाम न तो पाकिस्तान के एग्जिट रिकॉर्ड में था और न ही भारत के एंट्री रिकॉर्ड में मिला। पहले माना गया कि वह लापता है। इसके बाद उसके बारे में पाकिस्तान में भी लोकल पुलिस ने जांच शुरू कर दी। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भी उसकी तलाश शुरू कर दी। निकाहनामा और वीडियो वायरल होने से पता चला इसके बाद अचानक उर्दू में लिखा सरबजीत का निकाहनामा वायरल हो गया। जिसमें लिखा था कि सरबजीत ने पाकिस्तान में इस्लाम धर्म अपना लिया है। उसने शेखुपुरा नूर हुसैन नाम के मुस्लिम व्यक्ति से निकाह कर लिया है। इसके बाद 15 नवंबर को उसका एक वीडियो भी वायरल हो गया। जिसमें उसने मौलवी को कहा कि वह मुस्लिम बनना चाहती है। सरबजीत ने कहा कि वह नासिर से प्यार करती है और 9 साल से उसे जानती है। सरबजीत ने यह भी कहा था कि मेरा तलाक हो चुका है।