'फेक पोस्टर' वाले कैंडीडेट सरकारी- एडेड स्कूलों के टीचर्स संग ले गए ट्रेनिंग, मामला पता चलते ही डीसी ने लगाई रोक

शुभेंदु शुक्ला | अमृतसर पंजाब सरकार ड्रग व सामाजिक-आर्थिक सर्वे शुरू कराने जा रही है। ग्राउंड पर काम शुरू करने से पहले सर्वे को लेकर प्रति घर 250 रुपए तो 45 दिन के 62 हजार मानदेय पर कांट्रेक्चुअल ग्रेजुएट अभ्यर्थी, आउटसोर्स मुलाजिम, आंगनबाड़ी वर्करों को रखने का फेक पोस्टर बीते रविवार से वायरल होता रहा। जिसमें मोबाइल/डेटा एंट्री ऐप्स की बेसिक जानकारी होना अनिवार्य बताया गया था। मामला चंडीगढ़ पहुंचा तो इस पोस्टर को फेक बताते हुए डीसी ने रोक लगा दी है। लेकिन हैरानीजनक यह है कि इस पोस्टर के अनुसार ही निगम के थर्ड फ्लोर में ग्रेजुएट व फाइनल ईयर के स्टूडेंट का रजिस्ट्रेशन व इंटरव्यू कराने के बाद करीब 5 घंटे की ट्रेनिंग भी दे दी गई। इतना सबकुछ हो गया और यह भनक नहीं लग पाई कि आखिर यह फेक पोस्टर वायरल किसने किया। कॉट्रैक्ट पर अभ्यर्थियों को नहीं रखा जाना था जो सुबह 9:30 से शाम 5 बजे तक रजिस्ट्रेशन व ट्रेनिंग की प्रक्रिया किस तरह से पूरी करा ली गई। अब बताया जा रहा है कि सर्वे के लिए सरकारी व एडेड स्कूलों के टीचरों के अलावा दूसरे विभागों से अफसर-मुलाजिम रखे जाने हैं। निगम दफ्तर के थर्ड फ्लोर में चल रही ट्रेनिंग के दौरान न तो कमिश्नर पहुंचे न ही ज्वाइंट कमिश्नर। चिंताजनक तो यह है कि निगम के उच्च अफसरों को फेक पोस्टर के बारे पता चल चुका था लेकिन बिल्डिंग के ही थर्ड फ्लोर में ग्रेजुएट अभ्यर्थियों के रजिस्ट्रेशन व ट्रेनिंग का काम दफ्तरी कामकाज की टाइमिंग के अलावा बाद में देर शाम तक चलता रहा लेकिन अनजान रहे। फाइनल ईयर में पढ़ रहे स्टूडेंट युवराज ने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ सेंसस के इस मुहिम में हिस्सा लेने आए हैं। कुछ ग्रेजुएट भी हो चुके हैं। इसकी जानकारी उसे अपने साथियों से ही मिली थी। जो भी अनिवार्य शर्तें थी, वह पूरी करते हैं। उम्मीद थी मौका जरूर मिलेगा। एडीसी (डी) रूरल कम जिला ड्रग सेंसस हैड सुरिंदर सिंह ने कहा कि किसी ने सोशल मीडिया पर फेक पोस्टर जारी किया गया था। कांट्रेक्ट बेस पर कोई ग्रेजुएट स्टूडेंट या आउटसोर्स मुलाजिम नहीं रखे जा रहे हैं। सरकार की गाइडलाइन व उच्च अफसरों के निर्देश अनुसार ही ड्रग सेंसस का काम पूरा कराया जाएगा। ऐसा कोई निर्देश अभी तक नहीं मिला है कि स्टूडेंट हायर किए जाने हैं। सरकारी व एडेड स्कूलों के टीचर्स और दूसरे विभागों के अफसर मुलाजिम ड्रग सेंसस का काम करेंगे। प्रशासन नशे के खिलाफ अलग-अलग तरीकों से मुहिम चलाता रहा है, जिसमें काफी हद तक सफलता भी मिली है। नशे को जड़ से खत्म करने में सबसे बड़ा योगदान युवाओं का है। ^ड्रग सेंसस सर्वे को लेकर जो पोस्टर वायरल हुआ है वह फेक है। ऐसी कोई हायरिंग नहीं की जा रही है। कोई ग्रेजुएट अभ्यर्थी कांट्रेक्ट पर नहीं रखे जाने हैं। -जय इंद्र सिंह, ज्वाइंट कमिश्नर, नगर निगम ^ड्रग सेंसस का काम यदि कोई टीचर अपनी स्वेच्छा से करना चाहे तो कर सकता है लेकिन जबरदस्ती ड्यूटी न लगाई जाए। यदि प्रशासन ऐसा करता है, तो विरोध जताएंगे। इस बारे डीसी से बात हो चुकी है। यदि इसके बाद भी ज्यादती हुई तो टीचर चुप नहीं बैठने वाले हैं। -अश्वनी अवस्थी, जिला प्रधान, डीटीएफ सोशल म​ीडिया पर वायल फेक पोस्टर और निगम दफ्तर के थर्ड फ्लोर पर मीटिंग हॉल में चल रही ड्रग सेंसस की ट्रेनिंग।