प्रदेश में अब भी हो रहे बाल विवाह:अप्रैल में ही 15 शादियां रुकवाईं, चार साल में 119 मामलों में प्रशासन ने किया हस्तक्षेप

पंजाब को शिक्षा और सामाजिक विकास के मामले में अग्रणी राज्यों में गिना जाता है, लेकिन बाल विवाह जैसी कुरीति अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ताजा सरकारी आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2026 के दौरान ही राज्य में 15 बाल विवाह रोके गए हैं। जबकि पिछले चार वर्षों में 119 बाल विवाह रोके गए हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चलाए जा रहे अभियान के तहत अप्रैल में समय रहते हस्तक्षेप कर 15 बाल विवाह रुकवाए गए। उनके अनुसार रोका गया हर बाल विवाह एक बच्चे के बचपन, शिक्षा और भविष्य को बचाने के बराबर है। सरकार ने 3000 से ज्यादा जागरूकता कार्यक्रम किए सरकार ने केवल कानूनी कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखा। अप्रैल 2026 के दौरान ही पूरे राज्य में 3000 से अधिक जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। स्कूलों, गांवों, आंगनवाड़ी केंद्रों और विभिन्न समुदायों में कार्यक्रम चलाकर लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों और बच्चों के अधिकारों के बारे में जागरूक किया गया। राज्य में जिला बाल सुरक्षा इकाइयों, चाइल्ड वेलफेयर कमेटियों और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से निगरानी की जा रही है। बाल विवाह से जुड़े किसी भी मामले की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर दी जा सकती है। किस जिले में कब रोके गए बाल विवाह अमृतसर (जनवरी 2024) : 14-15 वर्षीय लड़की की शादी रुकवाई। रोपड़ (नवंबर 2024) : 17 वर्षीय लड़के की शादी रुकवाई। गुरदासपुर (2025) : दो गांवों में नाबालिगों का विवाह रुकवाया। अप्रैल 2026 : राज्यभर में 15 मामलों में हस्तक्षेप कर शादियां रुकवाई। फाजिल्का सबसे आगे: सरकार के आंकड़ों के अनुसार बाल विवाह रोकने के मामलों में फाजिल्का जिला सबसे ऊपर रहा है। मोगा, बठिंडा, गुरदासपुर, मानसा, तरनतारन और अमृतसर में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। क्या कहता है कानून ...बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का विवाह गैरकानूनी है। इसके बावजूद हर साल दर्जनों मामले सामने आना चिंता का विषय माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार गरीबी, सामाजिक दबाव, पारिवारिक परंपराएं और शिक्षा का अभाव इसके प्रमुख कारण हैं। ​किस साल कितने बाल विवाह के मामले रोके विभागीय आंकड़ों के अनुसार 2022 से अब तक पंजाब में 119 बाल विवाह रोके गए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि बाल विवाह की समस्या अभी भी समाप्त नहीं हुई है और प्रशासन को लगातार हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। वर्ष मामले रुके 2022 31 मामले 2023 20 मामले 2024 42 मामले 2025 26 मामले