विक्की कुमार | अमृतसर थाना जंडियाला गुरु पुलिस की ओर से फरवरी 2025 में दर्ज फर्जी हथियार लाइसेंस के मामले में जांच तेज कर दी है। हाई-प्रोफाइल मामले के तार अब डीसी कार्यालय के अधीन आती असलाह ब्रांच से जुड़ते दिख दे रहे हैं। शुरुआती जांच के दौरान पुलिस के हाथ सिर्फ 6 संदिग्ध लाइसेंसों के नंबर लगे थे, लेकिन जांच का दायरा बढ़ा तो आंकड़ा बढ़कर 42 पहुंच चुका है। एसएसपी देहाती ने डीसी को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए पुलिस ने इन सभी 42 संदिग्ध आर्म्स लाइसेंस फाइलों का तकनीकी और डिजिटल डेटा जल्द से जल्द सौंपने को कहा है। एसएसपी देहाती की ओर से डीसी को भेजे पत्र के माध्यम से आईपी एड्रेस, मैक एड्रेस और पोर्ट एड्रेस की मांग की है। देहाती पुलिस आईपी एड्रेस की जांच करके पता करेगी कि किस इंटरनेट कनेक्शन और लोकेशन से फाइल अपलोड की गई है। मैक एड्रेस से उस कंप्यूटर या डिवाइस के हार्डवेयर की सटीक पहचान करेगी, जिस पर यह पूरा खेल रचा जा रहा था। पुलिस ने 42 संदिग्ध आर्म्स लाइसेंसों के नंबरों की सूची भी साथ भेजी है। सूची में दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 तक के असलाह लाइसेंस हैं। मामला 7 फरवरी 2025 को उस समय सामने आया जब जिला सांझ केंद्र अमृतसर-देहाती के प्रभारी इंस्पेक्टर मनजिंदर सिंह ने पोर्टल के असलाह मॉड्यूल (हथियार लाइसेंस मॉड्यूल) की रूटीन चेकिंग की। जांच के दौरान पाया कि कई फाइलों पर गलत डिस्पैच नंबर दर्ज थे और वे डीसी दफ्तर अमृतसर भेजी गई थीं। जब इस संबंध में ऑफिस के मूल डिस्पैच रजिस्टर का मिलान किया, तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। ई-सेवा एप्लिकेशन के 69790947, 68493604, 65676684, 70734449, 70376343, 68070331, 65518512, 66482737 और 65852870 देखे तो इनका सरकारी रजिस्टर में कोई नामोनिशान नहीं था। लेकिन यह फाइल अॉनलाइन इस दफ्तर के सांझ पोर्टल में से डीसी दफ्तर में भेजी गई है। इन फाइलों पर एसएसपी देहाती के हस्ताक्षर प्रिंट मिले परंतु असल में उक्त फाइलों पर एसएसपी देहाती की ओर से हस्ताक्षर ही नहीं किए गए और न ही उनकी तरफ से करवाए गए। इस संबंधी असलाह हैड की सीट पर तैनात कांस्टेबल निर्मल सिंह निवासी साहनेवाली कत्थूनंगल से पूछताछ की तो उसने बताया कि लालच में आकर अपने दोस्त असीम अनेजा निवासी जंडियाला गुरु के साथ मिलकर असलाह की उक्त फाइलों पर एसएसपी देहाती के हस्ताक्षरों की फोटो कॉपी तैयार करवाई है। मामले की जांच शुरु होने से आशंका है कि डीसी दफ्तर की असलाह शाखा के कर्मचारी कहीं न कहीं इस फर्जीवाड़े में संलिप्त हैं। बिना किसी अंदरुनी मिलीभगत के सांझ पोर्टल के कोड/पासवर्ड का गलत इस्तेमाल करना और फाइलों को इस तरह आगे बढ़ाना मुमकिन नहीं है। सारे रैकेट को जहां डीसी दफ्तर के असलाह ब्रांच से निकाले गए कर्मचारी ही चला रहे हैं। इन लोगों ने डीसी दफ्तर के पास ही अपने दफ्तर बनाए हैं और डीसी दफ्तर के कर्मियों के साथ ही अच्छे संबंध हैं।

