ज्ञानी हरप्रीत सिंह भी एसआईटी को घर बुला दे चुके हैं बयान : ज्ञानी रघबीर सिंह

दमदमी टकसाल के प्रमुख सेवादार भाई हरनाम सिंह खालसा एवं शिअद अमृतसर के प्रधान सिमरनजीत सिंह मान के बाद अब श्री अका तख्त साहिब के 2 पूर्व जत्थेदारों में वाकयुद्ध छिड़ गया है। बहबल कलां गोलीकांड में पंजाब सरकार की ओर से गठित एसआईटी को ज्ञानी रघबीर सिंह द्वारा बयान दर्ज करवाने पर टिप्पणी करते हुए ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा था कि ज्ञानी रघबीर सिंह का बयान दर्ज करवाना सिख मर्यादा, सिद्धांतों व परंपराओं के खिलाफ है, यह मर्यादा का उल्लंघन है। अब ज्ञानी रघबीर सिंह ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह को जवाब देते हुए कहा कि संभवता ज्ञानी हरप्रीत सिंह भूल चुके हैं कि श्री गुरु ग्रंथ सा​िहब के गायब 328 पावन स्वरूपों के मामले में उन्होंने भी एसआईटी को घर बुलाकर अपना बयान दर्ज करवाया था। ज्ञानी रघबीर सिंह ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह को सलाह दी है कि धर्म से मार्गदर्शन हासिल कर धार्मिक सियासत करनी चाहिए लेकिन उनपर धर्म की बजाए राजनीति ज्यादा प्रभावित है, वह राजनीति से प्रेरित होकर बयानबाजी कर रहे हैं। हालांकि ज्ञानी रघबीर सिंह स्पष्ट कर चुके हैं कि वह एसआईटी के सामने पेश नहीं हुए थे, एसआईटी के सदस्य उनसे समय हासिल कर बातचीत करने के लिए उनके घर पहुंचे थे। ज्ञानी रघबीर सिंह यह भी स्पष्ट कर चुके हैं ऐसा करके न तो उन्होंने कोई गलती की है और न ही कोई मर्यादा का उल्लंघन किया है। एसआईटी ने सिर्फ 2 दिसंबर 2024 में बतौर अकाल तख्त के जत्थेदार जो फरमान जारी किए थे बस उसकी जानकारी ही हासिल की थी। इसके अलावा गायब पावन स्वरुपों या अन्य किसी मसले पर कोई बातचीत नहीं हुई थी।