राजन गोसाईं | अमृतसर सिविल अस्पताल की इमारत के रंग-रोगन को लेकर पंजाब की सियासत में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। "आप' सरकार को घेरते हुए विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल की मूल विरासती पहचान को सोचे-समझे तरीके से खत्म किया जा रहा है। अस्पताल की इमारत पहले जहां लाल और कत्थई रंग के पारंपरिक विरासती स्वरूप में नजर आती थी, वहीं अब दीवारों पर पीला और उसके गुंबदों व अन्य हिस्सों पर नीला रंग किया जा रहा है। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि पीले और नीले रंग का यह कॉम्बिनेशन सत्तारूढ़ दल के झंडे के रंगों से मेल खाता है, जो कि सरकारी संस्थानों के राजनीतिकरण का प्रयास है। पंजाब की पूर्व सरकारों ने राज्य के गौरवशाली इतिहास, सिख वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के उद्देश्य से कई सरकारी भवनों, अस्पतालों और कार्यालयों को विरासती स्वरूप दिया था। कांग्रेस के पूर्व जिला प्रधान और पूर्व विधायक जुगल किशोर शर्मा ने उक्त बदलाव पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि अस्पताल को जलियांवाला बाग के शहीदों की याद में समर्पित करते हुए विशेष विरासती रूप दिया गया था। लेकिन ‘आप' सरकार अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए ऐतिहासिक धरोहरों के मूल स्वरूप से खिलवाड़ कर रही है। अगर सरकार ने इमारत को फिर से पुराना हेरिटेज लुक नहीं दिया तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करेगी। ^अभी इस मामले की मुझे कोई जानकारी नहीं है। मंगलवार को इस विषय में पूरी जानकारी हासिल करने के बाद ही कोई उचित जवाब दे पाऊंगा। -सरबजोत सिंह धंजल, नवनियुक्त जिला प्रधान,आप भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलिएवाल ने सरकार को घेरते हुए कहा कि अमृतसर की अपनी एक ऐतिहासिक वास्तुकला और पहचान है, जिसे बचाए रखना बेहद जरूरी है। तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार के समय अस्पताल को शहीदों के सम्मान में पारंपरिक नानकशाही शैली के तहत लाल-कत्थई रंग दिया गया था। अब मौजूदा सरकार इस विरासती इमारत पर अपनी पार्टी के झंडे का रंग पोत रही है, जिसे भाजपा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।

