अमृतसर में किसान-मजदूर मोर्चा ने लोहड़ी पर जलाई कॉपियां:बीज बिल समेत जन-विरोधी कानूनों का विरोध; बोले- रोजगार हो रहा खत्म

अमृतसर जिले में किसान मजदूर मोर्चा (भारत) के पंजाब चैप्टर ने लोहड़ी के अवसर पर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान 20 जिलों के शहरों, कस्बों और गांवों में लोहड़ी की आग में बिजली संशोधन बिल 2025, वीबी/रामजी बिल 2025, बीज बिल 2025 और कर-मुक्त समझौतों सहित अन्य 'जन-विरोधी काले कानूनों' की प्रतियां जलाई गई। प्रदर्शन अमृतसर, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, तरनतारन, फिरोज़पुर, मोगा, लुधियाना, बरनाला, श्री मुक्तसर साहिब, फाजिल्का, बठिंडा, संगरूर, मानसा, पटियाला, मोहाली, रोपड़, फतेहगढ़ साहिब और नवांशहर जिलों में आयोजित किया गया। कॉर्पोरेट घरानों के पक्ष में नीतियां तैयार किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंधेर ने आरोप लगाया कि विश्व व्यापार संगठन (WTO), विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के दिशा-निर्देशों के तहत कॉर्पोरेट घरानों के पक्ष में नीतियां बनाई जा रही हैं। इन नीतियों के परिणामस्वरूप भारत की जनता पर थोपे जा रहे कानूनों के खिलाफ पंजाब की जनता सड़कों पर उतरी। कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों किसान, मजदूर, कर्मचारी, महिलाएं, शहरी नागरिक, विद्यार्थी और छोटे कारोबारी इन विरोध कार्यक्रमों में शामिल हुए। देश के संघीय ढांचे पर हमला मोर्चे ने कहा कि यह भागीदारी केंद्र की मोदी सरकार और पंजाब की भगवंत मान सरकार के प्रति जनता की नाराजगी को दर्शाती है। मोर्चे ने केंद्र सरकार पर 'जन-विरोधी काले कानून' लाने के साथ-साथ देश के संघीय ढांचे पर हमला करने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, बिजली, बीज, बाजार, अनुसंधान, पानी, शिक्षा और कृषि जैसे विषयों पर राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर असंवैधानिक तरीके से कानून बनाए जा रहे हैं। पंजाब सरकार पर आरोप लगाया कि वह इन कानूनों का विरोध करने के बजाय केंद्र के साथ मिलकर 'कॉर्पोरेट-परस्त नीतियां' लागू कर रही है। रेहड़ी-पटरी वालों का रोजगार हो रहा खत्म मोर्चे ने कहा कि राज्य सरकार पंजाब में चल रहे आंदोलनों को बदनाम कर उन्हें दबाने का प्रयास कर रही है। मोर्चे ने चेतावनी दी कि यह संघर्ष केवल किसानों या मजदूरों तक सीमित नहीं है। ऑनलाइन व्यापार और बड़े शॉपिंग मॉल की नीतियों के कारण छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों का रोजगार भी धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब में 'राज्य प्रायोजित नशा' चरम पर है, बेरोजगार युवाओं को अपराध की दुनिया में धकेला जा रहा है और कानून-व्यवस्था की स्थिति 'बेहद चिंताजनक' हो चुकी है। मोर्चे ने इन हालात के खिलाफ एक बड़े जन संघर्ष की आवश्यकता पर बल दिया। आगामी कार्यक्रमों की घोषणा 18 जनवरी- मजीठा रैली में पंजाब सीएम से सवाल। 21–22 जनवरी- स्मार्ट मीटर उतारकर नजदीकी बिजली दफ्तरों में करवाएंगे जमा। 5 फरवरी- पंजाब के विधायकों और मंत्रियों के घरों का घेराव। मोर्चे ने पंजाब की जनता से इन सभी कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। कार्यक्रमों में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब, बीकेयू क्रांतिकारी, बीकेयू दोआबा, बीकेयू आजाद, बीकेयू बहिराम के, किसान मज़दूर हितकारी सभा, बीकेयू भनेड़ी, बीकेएमयू, पीआरटीसी, पनबस, पंजाब रोडवेज सहित अन्य भाईचारा संगठनों ने भी सहयोग दिया।