‘बंदी सिखों की रिहाई पर गंभीर नहीं सुखबीर’

भास्कर न्यूज | अमृतसर संत समाज व दमदमी टकसाल के प्रमुख सेवादार भाई हरनाम सिंह खालसा ने शिअद अमृतसर के अध्यक्ष व पूर्व सांसद सिमरनजीत सिंह मान पर पलटवार करते हुए कहा है कि मान के मन में उनके प्रति नफरत भरी हुई है। मान ने कट्टरपंथी नेता होने का ऐसा मुखौटा पहन रखा है कि 6 जून को ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी के मौके पर अकाल तख्त पर आयोजित किए जाने वाले समारोह में भी सिख भयभीत होने के चलते समागम में शमूलियत ही नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि मान शहीदों की शहादत पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। उन्होंने फिर दोहराया कि मान मेरे दिल में नफरत रखना बंद करते हुए समझदार बनें। उन्होंने मान को बेतुकी बयानबाजी न करने की सलाह देते हुए कहा है कि, "तैनूं (मान) मरवा के मैनूं की हासिल होना ए’। जितनी नफरत तेरे मन में मेरे प्रति है, उतनी मेरे मन में नहीं है। इसलिए मान भड़काऊ बयानबाजी बंद करें, अन्यथा मान को सबक सिखाना उन्हें भी अच्छी तरह से आता है। गौर हो कि 6 जून को ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर मान ने आरोप लगाया था कि भाई खालसा उन्हें मरवाना चाहते हैं। पिछले एक महीने से दोनों पक्षों में आरोपों-प्रत्यारोपों व वाकयुद्ध का सिलसिला लगातार जारी है। संत समाज व दमदमी टकसाल के प्रमुख सेवादार भाई हरनाम सिंह खालसा ने कहा है कि बंदी सिखों की रिहाई के लिए एसजीपीसी व शिअद बादल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल संजीदा नहीं हैं। दशकों बीत जाने के बावजूद सुखबीर बादल बंदी सिखों की रिहाई नहीं करवा पाए हैं, जबकि केंद्र में शिअद बादल का 10 साल तक भाजपा के साथ गठबंधन भी रहा है। वास्तव में बादल बंदी सिखों की रिहाई करवाना ही नहीं चाहते हैं, उनकी मानसिकता यानी सोच सिखों की रिहाई करवाने की है ही नहीं। दरअसल, शिरोमणि अकाली दल कई धड़ों में विभाजित हो चुका है, अकाली दलों में एकता ही नहीं है। सिख कौम एकजुट ही नहीं है महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस के माध्यम से वह बंदी सिखों की रिहाई के लिए प्रयासरत हैं। देवेंद्र फडनवीस के माध्यम से वह केंद्र सरकार के समक्ष बंदी सिखों की रिहाई के लिए आवाज बुलंद करने में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि गंगा में नहा लेने से कोई जनसंघी नहीं हो जाता है, गुरु साहिबान भी गंगा तट पर अपनी तपस्या करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अकाली-भाजपा गठबंधन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय प्रकाश सिंह बादल व पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल भी मंदिरों में जाते रहे हैं और पूजा-पाठ करते रहे हैं, ऐसा करने से कोई आरएसएस समर्थक नहीं बन जाता है।