‘सरबत दा भला' की सोच तय कर सकती है एआई की दिशा’

भास्कर न्यूज | अमृतसर सिख पंथ और देश के लिए यह बड़े गर्व की बात है कि पूर्व वाइस-चांसलर प्रो. करमजीत सिंह ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के एक विशेष अंतर-धर्म संवाद में सिख धर्म का प्रतिनिधित्व किया। वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सुरक्षा और नैतिकता विषय पर हुए इस वैश्विक संवाद में बतौर विशिष्ट वक्ता शामिल होने वाले पहले सिख प्रतिनिधि बने हैं। इस प्रतिष्ठित सत्र का उद्घाटन यूएनआईडीआईआर के निदेशक डॉ. रॉबिन गीस ने किया। प्रो. करमजीत सिंह ने अपने संबोधन की शुरुआत "वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह’ से की। उन्होंने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा लिखित ‘जफरनामा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जिम्मेदार नेतृत्व के लिए जवाबदेही और नैतिक साहस अनिवार्य है। उन्होंने एआई की सही दिशा तय करने के लिए पांच मूल सिद्धांत- निरभउ-निरवैर, किरत करो, वंड छको, सेवा और संगत-पंगत प्रस्तुत किए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिख अरदास का ‘सरबत दा भला' सिद्धांत एआई के विकास को सही राह दिखा सकता है। अंत में उन्होंने कहा कि असली सवाल यह नहीं कि एआई कितनी बुद्धिमान होगी, बल्कि यह है कि मानवता उसे सही दिशा देने में कितनी समझदारी दिखाती है।